प्रकाशित: 27 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
नीति आयोग की रिपोर्ट में चेतावनी: भारत में जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों की संख्या दोगुनी होकर 2030 तक 5 करोड़ हो सकती है
नीति आयोग ने 22 जनवरी 2026 को जयपुर में भारतीय सामग्री पुनर्चक्रण संघ (MRAI) के अंतरराष्ट्रीय सामग्री पुनर्चक्रण सम्मेलन में अपनी रिपोर्ट जारी की। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने 27 जनवरी को बताया कि भारत में जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों की संख्या 2025 के 2.3 करोड़ से बढ़कर 2030 तक 5 करोड़ हो सकती है। इस समय ज़रूरी 500 स्वचालित परीक्षण केंद्रों में से सिर्फ़ 156 चालू हैं। इन वाहनों के निस्तारण में असंगठित क्षेत्र का दबदबा है, जबकि संगठित केंद्रों ने वित्त वर्ष 2024-25 में सिर्फ़ 72,000 वाहन संभाले।
रिपोर्ट में स्वचालित परीक्षण केंद्रों का तेज़ी से विस्तार करने, पुनर्चक्रण क्षेत्र को संगठित करने, स्क्रैपेज प्रमाणपत्रों की डिजिटल निगरानी करने, पुराने वाहन स्क्रैप कराने वाले मालिकों को कर में प्रोत्साहन देने और नए वाहनों के उत्पादन में पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग अनिवार्य करने की सिफ़ारिश की गई है। यह रिपोर्ट 2021 में शुरू की गई वाहन स्क्रैपेज नीति के अनुरूप है और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था अपनाने पर ज़ोर देती है।
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Tपर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय परिवर्तन
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीति आयोग की रिपोर्ट ने भारत में जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों के बारे में क्या चेतावनी दी?
**नीति आयोग की रिपोर्ट** ने चेतावनी दी कि **भारत में जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों की संख्या दोगुनी होकर 5 करोड़** तक पहुँच सकती है। इससे वाहन स्क्रैप करने, सामग्री के पुनर्चक्रण और पर्यावरण प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। **जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहन** वे हैं जिनकी उपयोगी आयु पूरी हो चुकी है। भारत की वाहन स्क्रैपेज नीति के अनुसार यात्री वाहनों के लिए यह अवधि 15 वर्ष और वाणिज्यिक वाहनों के लिए 20 वर्ष है। भारत में **30 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहनों** का बड़ा बेड़ा है और 2000 के दशक में वाहन बिक्री में आए उछाल के बाद अब बड़ी संख्या में वाहन अपनी जीवन-अवधि पूरी कर रहे हैं।
भारत की वाहन स्क्रैपेज नीति क्या है और यह जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों से कैसे निपटती है?
भारत की **वाहन स्क्रैपेज नीति (2021)** वाहनों की **फिटनेस और सड़क पर चलने की योग्यता की जाँच** अनिवार्य करती है और पुराने वाहन स्क्रैप कराने के लिए प्रोत्साहन देती है: (1) डीलर से नया वाहन खरीदने पर **8-25% छूट**; (2) स्क्रैप किए गए वाहन की जगह नया वाहन लेने पर **पंजीकरण शुल्क में छूट**; (3) पुराने वाहनों का उपयोग घटाने के लिए **हरित कर**; (4) देशभर में **पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र स्थापित करना**; और (5) निजी वाहनों के लिए **15 वर्ष** तथा असंगठित क्षेत्र के वाणिज्यिक वाहनों के लिए **20 वर्ष** की वैधता।
जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों का व्यवस्थित निस्तारण और पुनर्चक्रण पर्यावरण तथा अर्थव्यवस्था के लिए कौन से अवसर पैदा करता है?
भारत में **जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों के व्यवस्थित निस्तारण और पुनर्चक्रण** से कई महत्वपूर्ण अवसर पैदा होते हैं: (1) **महत्वपूर्ण सामग्री की पुनर्प्राप्ति** — हर कार में 900 kg से अधिक स्टील, 50 kg से अधिक एल्युमीनियम, ताँबा, इलेक्ट्रिक वाहनों से लिथियम और कैटेलिटिक कन्वर्टर से प्लैटिनम समूह की धातुएँ मिल सकती हैं; (2) **चक्रीय अर्थव्यवस्था** — इन सामग्रियों की पुनर्प्राप्ति से स्टील और एल्युमीनियम के आयात पर निर्भरता घटती है; (3) **रोज़गार सृजन** — संगठित वाहन स्क्रैपिंग से 3 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिल सकता है; (4) **प्रदूषण में कमी** — पुराने वाहन नए वाहनों से 10-40 गुना अधिक प्रदूषक छोड़ते हैं; और (5) **इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी का पुनर्चक्रण** — भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के साथ लिथियम की पुनर्प्राप्ति के लिए संगठित स्क्रैपिंग ढाँचा ज़रूरी है।
पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र क्या हैं और भारत कितने ऐसे केंद्र स्थापित करना चाहता है?
**पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र** सरकार से अधिकृत केंद्र हैं, जहाँ जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों को कानूनी रूप से अलग-अलग पुर्ज़ों में खोला जाता है, मूल्यवान सामग्री निकाली जाती है और हानिकारक कचरे का सुरक्षित निपटान किया जाता है। ये केंद्र **सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय** में पंजीकृत होते हैं। भविष्य में बड़ी संख्या में स्क्रैप होने वाले वाहनों को संभालने के लिए भारत का लक्ष्य देशभर में **450 से अधिक ऐसे केंद्र** स्थापित करना है। **महा मुंबई वाहन स्क्रैपिंग एवं पुनर्चक्रण क्लस्टर (MMVSRC)**, **मारुति सुज़ुकी का स्क्रैपिंग उद्यम CERO** और **मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉरपोरेशन (MSTC)** इस क्षेत्र में शुरुआती संस्थानों में शामिल हैं।
वाहन स्क्रैपेज भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव से कैसे जुड़ा है?
वाहन स्क्रैपेज और **इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की प्रक्रिया** आपस में जुड़ी हैं: (1) पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को स्क्रैप करने से **कुल उत्सर्जन तुरंत घटता है**; (2) **स्क्रैपेज प्रमाणपत्र से नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर छूट** मिलती है, जिससे इन्हें अपनाने का प्रोत्साहन मिलता है; (3) जीवन-अवधि पूरी कर चुके इलेक्ट्रिक वाहनों से **बैटरी में इस्तेमाल होने वाले लिथियम, कोबाल्ट और निकल की पुनर्प्राप्ति** भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की **चक्रीय अर्थव्यवस्था** के लिए ज़रूरी है; (4) **इलेक्ट्रिक वाहनों को तेज़ी से अपनाने और उनके विनिर्माण की फेम इंडिया योजना** तथा **पीएम ई-ड्राइव योजना** स्क्रैपेज प्रोत्साहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति बढ़ाती हैं। भारत ने **2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की 30% बाज़ार हिस्सेदारी** का लक्ष्य रखा है।