प्रकाशित: 20 दिसंबर 2025समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम: 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी और राजपत्र अधिसूचना — बीमा क्षेत्र में प्रमुख सुधार
सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम को 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की सहमति मिली और इसे आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किया गया। भारत के बीमा क्षेत्र के उदारीकरण में यह एक बड़ा कदम है। 1999 के IRDA अधिनियम के बाद से यह भारत की बीमा संरचना में सबसे व्यापक सुधारों में से एक है।
एक महत्वपूर्ण प्रावधान भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना अपने विदेशी परिचालन को पुनर्गठित करने की स्वायत्तता देता है। इससे वैश्विक बीमा बाजारों में LIC की कामकाजी तेजी बढ़ेगी।
यह अधिनियम IRDAI को डिसगॉर्जमेंट शक्तियां भी देता है, यानी नियामक उल्लंघन होने पर बीमा संस्थाओं से अवैध लाभ वसूलने का अधिकार। यह IAIS मूल सिद्धांतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण नियामक सुधार है।
पुनर्बीमा बाजार को मजबूत करने के लिए, अधिनियम विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए नेट ओन फंड (NOF) आवश्यकता को 5,000 करोड़ से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये करता है। इससे अधिक वैश्विक पुनर्बीमाकर्ताओं के भारत में आने की उम्मीद है।
इसके अलावा, अधिनियम कुछ बीमा परिचालनों के लिए अनिवार्य संयुक्त उद्यम (JV) आवश्यकता को हटाता है, जिससे विदेशी संस्थाओं को अधिक लचीलापन मिलता है। ये सुधार बीमा की पहुंच बढ़ाने और भारत को एक प्रतिस्पर्धी बीमा केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
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प्रश्न: सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम, 2025 के प्रमुख सुधारों का विश्लेषण।
उत्तर (50 शब्द):
21 दिसंबर 2025 को अधिसूचित सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम जीवन बीमा निगम को सरकारी अनुमोदन के बिना विदेशी पुनर्गठन की स्वायत्तता देता है। यह IRDAI को IAIS-अनुरूप डिसगॉर्जमेंट शक्ति देता है, विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए शुद्ध स्वामित्व कोष 5,000 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपये तक घटाता है और अनिवार्य संयुक्त उद्यम शर्त हटाकर 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तहत बीमा पैठ गहराता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम क्या है और इसे आधिकारिक रूप से कब अधिसूचित किया गया?
यह बीमा क्षेत्र में सुधार से जुड़ा एक ऐतिहासिक कानून है, जिसे 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किया गया।
यह अधिनियम LIC को क्या नई स्वायत्तता देता है?
LIC अब सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना अपने विदेशी परिचालन का पुनर्गठन कर सकती है, जिससे वैश्विक बीमा बाजारों में उसका लचीलापन बढ़ेगा।
डिसगॉर्जमेंट शक्तियां क्या हैं और ये IRDAI को क्यों दी गईं?
डिसगॉर्जमेंट शक्तियां IRDAI को नियामक नियमों का उल्लंघन करने वाली बीमा संस्थाओं से अवैध लाभ वसूलने का अधिकार देती हैं। यह IAIS मूल सिद्धांतों के अनुरूप है।
विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए NOF की आवश्यकता में क्या बदलाव हुआ?
विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए नेट ओन फंड (NOF) की आवश्यकता 5,000 करोड़ से घटाकर 1,000 करोड़ कर दी गई, जिससे अधिक वैश्विक पुनर्बीमाकर्ताओं के भारत में आने की उम्मीद है।
इस अधिनियम से कौन-सी अनिवार्य आवश्यकता हटाई गई?
कुछ बीमा परिचालनों के लिए अनिवार्य संयुक्त उद्यम (JV) की शर्त हटा दी गई, जिससे विदेशी संस्थाओं को भारत में अपनी उपस्थिति की संरचना तय करने में अधिक लचीलापन मिलता है।