केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 12 मई 2026 को विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 की अधिसूचना जारी कर दी, जिसे आम तौर पर वीबी-जी रैम जी कहा जाता है। यह कानून 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा और उसी तिथि से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 निरस्त कर दिया जाएगा। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिसूचना की पुष्टि करते हुए बताया कि नया कानून हर ऐसे ग्रामीण परिवार के लिए, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य के लिए स्वेच्छा से तैयार हों, प्रति वित्त वर्ष वैधानिक रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर देता है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा आवंटित किया है। राज्यों के हिस्से जोड़ने पर कुल कार्यक्रम परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जो बजट अनुमान चरण में भारत के इतिहास का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार आवंटन है। मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन के भीतर मजदूरी का भुगतान अनिवार्य है तथा देरी पर अदत्त मजदूरी पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति देय होगी। यह अधिनियम चार विषयगत क्षेत्रों - जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़ी अवसंरचना और अत्यधिक मौसमी घटनाओं के शमन - पर केंद्रित है। वीबी-जी रैम जी के अंतर्गत प्राथमिक कार्यों में जलग्रहण विकास, भूजल पुनर्भरण, सिंचाई सहायता, वर्षा जल संचयन, वनरोपण, ग्रामीण सड़कें, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वच्छता, अक्षय ऊर्जा सुविधाएं और आवास से जुड़ी परिसंपत्तियां शामिल हैं। यह विधेयक 18-19 दिसंबर 2025 को संसद ने पारित किया था और इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली, जिससे 2005 से लागू बीस वर्ष पुराने अधिकार आधारित कानून का स्थान यह नई व्यवस्था लेगी।
सरकार ने 12 मई 2026 को विकसित भारत-जी रैम जी अधिनियम 2025 की अधिसूचना जारी की; यह 1 जुलाई 2026 से मनरेगा का स्थान लेगा तथा 125 दिन की ग्रामीण रोजगार गारंटी और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692 करोड़ रुपये का केंद्रीय आवंटन देगा
सरकार ने 12 मई 2026 को वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2025 की अधिसूचना जारी की; 1 जुलाई 2026 से प्रभावी यह नया कानून मनरेगा की जगह लेगा और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये के केंद्रीय आवंटन के साथ ग्रामीण मजदूरों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी देगा।
मुख्य तथ्य
- वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2025 की अधिसूचना 12 मई 2026 को जारी हुई; यह 1 जुलाई 2026 से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा
- प्रति वित्त वर्ष वैधानिक ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई
- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा और कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ से अधिक
- मस्टर बंद होने के 15 दिन में मजदूरी भुगतान तथा देरी पर 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन क्षतिपूर्ति
- चार विषयगत क्षेत्र - जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका अवसंरचना, जलवायु अनुकूलन
- 1 जुलाई 2026 से मनरेगा 2005 निरस्त
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
11 मई 2026 को अधिसूचित विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन गारंटी अधिनियम, ग्रामीण, 2025 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह प्रति वित्त वर्ष वैधानिक ग्रामीण रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करता है। 2. यह 1 जुलाई 2026 से लागू होगा और मनरेगा 2005 एक और वर्ष तक समानांतर रूप से चलता रहेगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा सही है या कौन-से सही हैं?
कथन 1 सही है - नया अधिनियम ग्रामीण रोजगार गारंटी को प्रति वित्त वर्ष 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करता है। कथन 2 गलत है - अधिनियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा और उसी तिथि से मनरेगा 2005 निरस्त हो जाएगा; दोनों कानून समानांतर रूप से लागू नहीं रहेंगे।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वीबी-जी रैम जी का पूरा नाम क्या है?
वीबी-जी रैम जी का पूरा नाम विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम 2025 है। यह नया ग्रामीण रोजगार कानून मनरेगा का स्थान लेता है।
वीबी-जी रैम जी कितने दिनों की रोजगार गारंटी देता है?
वीबी-जी रैम जी प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्त वर्ष 125 दिन के मजदूरी रोजगार की गारंटी देता है, बशर्ते उसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य के लिए तैयार हों। यह मनरेगा के 100 दिन से अधिक है।
यह नया अधिनियम कब से लागू होगा?
यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा; उसी तिथि से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 निरस्त हो जाएगा।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय आवंटन कितना है?
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय हिस्से के रूप में 95,692.31 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं तथा राज्यों के हिस्से जोड़ने पर कुल कार्यक्रम परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें