मुख्य तथ्य

  • कौशल नीति प्रशिक्षण, प्रमाणन, शिक्षुता, इंटर्नशिप और औपचारिक नियुक्ति प्रोत्साहन को रोजगार से जोड़ती है।
  • 12,000 करोड़ रुपये का बजट पीएमकेवीवाई 2.0 के लिए था; मौजूदा पीएमकेवीवाई 4.0 पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम का हिस्सा है।
  • पीएलएफएस वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति के आधार पर श्रमबल भागीदारी दर 60.1%, कामगार-जनसंख्या...
  • इस विषय में सामाजिक न्याय संरक्षण कानून, महिला सुरक्षा, आजीविका समूह, शिक्षा-अधिकार, स्वच्छ ईंधन और पेंशन तक फैला है।
  • राजस्थान का संबंध जयपुर के विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, रोजगार विभाग और मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना से स्पष्ट होता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    कौशल नीति प्रशिक्षण, प्रमाणन, शिक्षुता, इंटर्नशिप और औपचारिक नियुक्ति प्रोत्साहन को रोजगार से जोड़ती है।

  2. 2

    12,000 करोड़ रुपये का बजट पीएमकेवीवाई 2.0 के लिए था; मौजूदा पीएमकेवीवाई 4.0 पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम का हिस्सा है।

  3. 3

    पीएलएफएस वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति के आधार पर श्रमबल भागीदारी दर 60.1%, कामगार-जनसंख्या अनुपात 58.2% और बेरोजगारी दर 3.2% है।

  4. 4

    इस विषय में सामाजिक न्याय संरक्षण कानून, महिला सुरक्षा, आजीविका समूह, शिक्षा-अधिकार, स्वच्छ ईंधन और पेंशन तक फैला है।

  5. 5

    राजस्थान का संबंध जयपुर के विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, रोजगार विभाग और मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना से स्पष्ट होता है।

PYQ दोहराव

पिछले 10 साल: 8 बार पूछा गयाकुल जुड़े PYQ: 12

यह टॉपिक 2024, 2021, 2018, 2016, 2013 में पूछा गया है। पहले नोट दोहराएँ, फिर जुड़े प्रश्न खोलें।

भारत में कौशल विकास का प्रशासनिक ढांचा कैसे बना?

भारत में कौशल विकास का प्रशासनिक ढांचा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, सेक्टर कौशल परिषदों, प्रशिक्षण प्रदाताओं, जन शिक्षण संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और शिक्षुता व्यवस्था के सहारे बना। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार पीएमकेवीवाई के अलग-अलग चरणों में शुरुआत से अब तक 1.63 करोड़ अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण या ओरिएंटेशन मिला है।

भारत का कौशल-विकास ढांचा पहले एक समर्पित प्रशासनिक आधार से शुरू होता है।

प्रशासनिक आधार और कार्यान्वयन तंत्र

  • कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) 9 नवंबर 2014 को पूरे देश में कौशल-विकास कोशिशों के समन्वय के लिए स्थापित किया गया।
  • इसके साथ कार्यान्वयन तंत्र बनाते हैं:
  • राष्ट्रीय कौशल विकास निगम
  • सेक्टर कौशल परिषदें
  • प्रशिक्षण प्रदाता
  • जन शिक्षण संस्थान
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान
  • शिक्षुता पोर्टल
  • कौशल भारत मिशन + प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 15 जुलाई 2015 से इस व्यवस्था का प्रमुख सार्वजनिक चेहरा बना।

पीएमकेवीवाई के चरण

चरणअवधि / स्थितिमुख्य तथ्य
पीएमकेवीवाई 1.0शुरुआती चरणशुरुआती अल्पकालिक प्रशिक्षण और प्रमाणन चरण था
पीएमकेवीवाई 2.02016-2012,000 करोड़ रुपये के बजट और 1 करोड़ युवाओं के लक्ष्य के साथ स्वीकृति मिली
पीएमकेवीवाई 3.015 जनवरी 2021 को शुरू; योजना अवधि 2020-218 लाख अभ्यर्थियों के लक्ष्य और 948.9 करोड़ रुपये के बजट के साथ चला
पीएमकेवीवाई 4.0वर्तमान पुनर्गठित व्यवस्थापीएम-एनएपीएस और जन शिक्षण संस्थान के साथ पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम में समाहित है
  • मुख्य सुधार: रु. 12,000 करोड़ वर्तमान पीएमकेवीवाई 4.0 का नहीं, बल्कि पीएमकेवीवाई 2.0 का आंकड़ा है।

राजस्थान संबंध

  • जयपुर का विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, जो 2017 के अधिनियम संख्या 6 से राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय के रूप में बना, पूरे राजस्थान के कौशल-शिक्षा संस्थानों को संबद्ध कर सकता है।
  • राजस्थान का विश्वविद्यालय मार्ग स्थानीय पाठ्यक्रम और जिला-कौशल अंतर को जल्दी पहचान सकता है।

कौशल व्यवस्था के जोखिम और उनके जवाब

जोखिमनीति का जवाब
नामांकन के बाद कोर्स पूरा न होनाहाजिरी की जांच, परामर्श, अभ्यर्थी को जोड़े रखने की व्यवस्था और कोर्स पूरा होने की निगरानी
प्रमाणपत्र मिलने पर भी कौशल साबित न होनाभरोसेमंद मूल्यांकन; पहले से हासिल कौशल की पहचान और प्रमाणन के लिए पूर्व-अधिगम की मान्यता
प्रशिक्षण के बाद मांग न होनाशिक्षुता और नियोक्ता प्रोत्साहन से अभ्यर्थी को वास्तविक कार्यस्थल और उत्पादन प्रक्रिया के करीब लाना
नियुक्ति के बाद काम में टिकाव न होनानियोक्ता की भागीदारी, काम के बाद निगरानी और टिकाव के आंकड़ों की जांच

कार्यान्वयन से जुड़े ज़रूरी सवाल

  • यह देखना उतना ही ज़रूरी है कि:
  • अभ्यर्थियों की पहचान कौन करता है
  • हाजिरी की पुष्टि कौन करता है
  • मूल्यांकन की गुणवत्ता कौन जांचता है
  • प्रशिक्षण के बाद आजीविका बेहतर हुई या नहीं, इसका रिकॉर्ड कौन रखता है
  • इसलिए मजबूत कौशल व्यवस्था के लिए साफ अभ्यर्थी आंकड़े, भरोसेमंद मूल्यांकन, नियोक्ताओं की भागीदारी और प्रशिक्षण के बाद निगरानी ज़रूरी है; सिर्फ़ बजट की घोषणा काफी नहीं है।

इसलिए परीक्षा में कौशल ढांचे को केवल योजना-सूची की तरह नहीं, बल्कि मंत्रालय, प्रशिक्षण तंत्र, उद्योग से जुड़ाव और राज्य-स्तर के कौशल विश्वविद्यालय की संयुक्त व्यवस्था की तरह पढ़ना चाहिए।

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संभावित प्रश्न

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1MCQपुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम पर इन कथनों पर विचार करें: 1. इसमें पीएमकेवीवाई 4.0, पीएम-एनएपीएस और जन शिक्षण संस्थान शामिल हैं। 2. रु. 12,000 करोड़ का परिव्यय पीएमकेवीवाई 2.0 से जुड़ा है, पीएमकेवीवाई 4.0 से नहीं। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1
  2. Bकेवल 2
  3. C1 और 2 दोनोंसही
  4. Dन तो 1, न 2

व्याख्या

दोनों कथन सही हैं: पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम पीएमकेवीवाई 4.0 को पीएम-एनएपीएस और जन शिक्षण संस्थान के साथ जोड़ता है, जबकि रु. 12,000 करोड़ का परिव्यय पीएमकेवीवाई 2.0 से जुड़ा है। विकल्प क परिव्यय-अंतर छोड़ता है, विकल्प ख वर्तमान कार्यक्रम संरचना छोड़ता है और विकल्प घ दो सही कथनों को अस्वीकार करता है।

~50 शब्द · 1 अंक