भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव और विकास हुआ है। केंद्र सरकार ने 2015 से इस क्षेत्र के विकास के लिए 39,272 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह निवेश प्रमुख योजनाओं के तहत किया गया है, जिनमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), ब्लू रिवोल्यूशन योजना और मत्स्य पालन और जलीय कृषि बुनियादी ढांचा विकास निधि (FIDF) शामिल हैं।

इसके नतीजे महत्वपूर्ण रहे हैं: भारत का मछली उत्पादन 106% से अधिक बढ़ा है — 2013-14 में 95 लाख टन से 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक, जिससे भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है। इस अवधि में समुद्री खाद्य निर्यात लगभग दोगुना होकर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

2020 में 20,050 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू की गई PM मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) देश की प्रमुख मत्स्य पालन विकास योजना है, जिसका उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, बुनियादी ढांचे में सुधार करना, मूल्य श्रृंखला का आधुनिकीकरण करना और मछुआरों का कल्याण करना है। PMMSY का लक्ष्य मत्स्य पालन क्षेत्र में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित करना भी है।

ब्लू इकॉनमी ढांचे में मत्स्य पालन को भारत की समुद्र-आधारित सतत विकास रणनीति का मूल घटक माना गया है। राजस्थान समुद्र से दूर स्थित राज्य है, फिर भी चंबल, माही और बनास नदी प्रणालियों तथा राणा प्रताप सागर, माही बजाज सागर और बीसलपुर जैसे जलाशयों में अंतर्देशीय मत्स्य पालन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रोटीन सुरक्षा में सार्थक योगदान देता है।