पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 26 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु और मेघालय में जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करने के लिए पांच वर्षीय परियोजना शुरू की। जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करने के लिए संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने नामक यह परियोजना भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संयुक्त पहल है। इसमें 2025-2030 के लिए 48.8 लाख अमेरिकी डॉलर का अनुदान है और इसका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण को अलग प्रशासनिक गतिविधि नहीं, बल्कि स्थानीय विकास योजना का हिस्सा बनाना है। परियोजना ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को पर्यावरण-अनुकूल बनाएगी और नए वित्तपोषण तरीकों का उपयोग करेगी, ताकि स्थानीय समुदायों और संस्थाओं के पास वित्तपोषित और समुदाय के स्वामित्व वाली जैव विविधता योजनाएं हों। यह दो पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण परिदृश्यों में काम करेगी। तमिलनाडु में पश्चिमी और पूर्वी घाटों के मिलन बिंदु पर स्थित सत्यमंगलम परिदृश्य में मुदुमलाई बाघ अभयारण्य और सत्यमंगलम बाघ अभयारण्य शामिल हैं, और परियोजना वन-सीमांत समुदायों के पारिस्थितिक ज्ञान का उपयोग करेगी, जो वन्यजीव गलियारों को बनाए रखते हैं। मेघालय में गारो हिल्स परिदृश्य नोकरेक जैवमंडल रिजर्व, बलपक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभयारण्य को जोड़ता है, और ग्राम पंचायतों के स्थानीय शासन समकक्ष के रूप में ग्राम रोजगार परिषदों का उपयोग करता है। मुख्य उद्देश्य स्थानीय विकास योजनाओं में जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना, पंचायती राज संस्थानों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों को मजबूत करना, तथा वन विभागों, राजस्व अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिक समाज को जोड़ने वाले परिदृश्य-स्तरीय समूह बनाना है। वित्तीय साधनों में पहुंच और लाभ-साझाकरण व्यवस्थाएं, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व सह-वित्तपोषण और हरित सूक्ष्म उद्यम शामिल होंगे, जो आजीविका को संरक्षण की जिम्मेदारी से जोड़ते हैं। परियोजना मंत्रालय और प्राधिकरण के प्लेटफ़ॉर्मों के जरिए दोहराने के लिए ज्ञान का दस्तावेजीकरण और क्षमता निर्माण भी करेगी, जिसमें महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों की आर्थिक तथा शासन भूमिकाओं पर ध्यान होगा। यह भारत की संशोधित राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना 2024-2030, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल 30 गुणा 30 लक्ष्य, भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं, तमिलनाडु विजन 2030 और मेघालय विजन 2030 में मदद करती है।
पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 26 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु और मेघालय पर केंद्रित पांच वर्षीय जैव विविधता शासन परियोजना शुरू की
पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 26 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु और मेघालय की स्थानीय योजनाओं में जैव विविधता को मुख्यधारा में लाने के लिए 48.8 लाख अमेरिकी डॉलर की पांच वर्षीय परियोजना शुरू की। यह परियोजना ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करेगी, स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करेगी, लाभ-साझाकरण और हरित उद्यमों के वित्तपोषण का उपयोग करेगी, और भारत की जैव विविधता तथा जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूती देगी।
मुख्य तथ्य
- पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 26 अप्रैल 2026 को पांच वर्षीय परियोजना शुरू की।
- भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम संयुक्त भागीदार हैं।
- परियोजना के पास 2025-2030 के लिए 48.8 लाख अमेरिकी डॉलर का अनुदान है।
- यह ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को हरित करेगी और स्थानीय विकास योजनाओं में जैव विविधता को मुख्यधारा में लाएगी।
- दो परिदृश्य तमिलनाडु का सत्यमंगलम और मेघालय का गारो हिल्स हैं।
- वित्तीय साधनों में पहुंच और लाभ-साझाकरण, कॉरपोरेट उत्तरदायित्व सह-वित्तपोषण और हरित सूक्ष्म उद्यम शामिल हैं।
- यह राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति 2024-2030, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल 30 गुणा 30 लक्ष्य और राज्य विजन दस्तावेजों को समर्थन देती है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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26 अप्रैल 2026 को शुरू हुई जैव विविधता शासन परियोजना का मुख्य ध्यान किन दो परिदृश्यों पर है?
परियोजना तमिलनाडु के सत्यमंगलम परिदृश्य और मेघालय के गारो हिल्स परिदृश्य पर आधारित है। अन्य जोड़े महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं, पर इस विज्ञप्ति में परियोजना परिदृश्य के रूप में नामित नहीं हैं।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नई जैव विविधता परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य संरक्षण को स्थानीय विकास योजनाओं और वित्तीय व्यवस्थाओं से जोड़कर जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करना है।
परियोजना किन क्षेत्रों में लागू होगी?
यह तमिलनाडु के सत्यमंगलम परिदृश्य और मेघालय के गारो हिल्स परिदृश्य में काम करेगी।
किन संस्थाओं ने परियोजना शुरू की?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने इसे शुरू किया।
कौन-से वित्तीय उपाय प्रस्तावित हैं?
विज्ञप्ति में पहुँच और लाभ-साझाकरण की व्यवस्थाएँ, कॉरपोरेट उत्तरदायित्व के तहत सह-वित्तपोषण और हरित सूक्ष्म उद्यमों का उल्लेख है।
किन समुदायों पर विशेष ध्यान है?
परियोजना में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों पर विशेष ध्यान है।
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