प्रकाशित: 14 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बाजार-आधारित शहरी परिवर्तन के लिए ₹1 लाख करोड़ का 'शहरी चुनौती कोष' मंजूर किया
14 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'शहरी चुनौती कोष' (UCF) को मंजूरी दी। इसके तहत देश भर में बाजार-आधारित शहरी बुनियादी ढांचे में बदलाव के लिए ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता तय की गई है। यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगी, जिसे 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है।
UCF अनुदान-आधारित व्यवस्था से बाजार-आधारित शहरी वित्तपोषण की ओर बदलाव को दर्शाता है। केंद्रीय सहायता परियोजना लागत के 25% तक होगी, जबकि शहरों को बाजार स्रोतों से न्यूनतम 50% राशि जुटानी होगी। इससे पांच वर्षों में कुल ₹4 लाख करोड़ के अनुमानित शहरी निवेश की संभावना है। परियोजनाओं का चयन प्रतिस्पर्धी 'चुनौती मोड' में होगा और उनका मूल्यांकन आर्थिक उत्पादकता, जलवायु लचीलेपन, समावेशिता और सेवा समानता के आधार पर किया जाएगा।
पात्र शहरों में 10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले सभी शहरी केंद्र, सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की राजधानियां और 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले प्रमुख औद्योगिक शहर शामिल हैं। छोटे ULBs के लिए ₹5,000 करोड़ की ऋण चुकौती गारंटी योजना स्वीकृत की गई है। राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, कोटा और अजमेर जैसे शहर प्रतिस्पर्धी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण से लाभान्वित हो सकते हैं।
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प्रश्न: 14 फरवरी 2026 को 1 लाख करोड़ केंद्रीय सहायता से स्वीकृत शहरी चुनौती कोष तथा टियर-2 शहरों के लिए इसकी क्षमता का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
14 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता वाला शहरी चुनौती कोष स्वीकृत किया। यह लागत का 25% वहन करेगा और 50% बाजार वित्त जुटाने पर जोर देगा, जिससे कुल 4 लाख करोड़ शहरी निवेश प्रेरित होगा। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर लक्षित हैं; 5,000 करोड़ क्रेडिट गारंटी सहित जयपुर लाभान्वित होगा।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित शहरी चुनौती कोष का परिव्यय कितना है?
व्याख्या · सही उत्तर Cकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष को मंजूरी दी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शहरी चुनौती कोष कब स्वीकृत हुआ और इसका कुल कोष कितना है?
शहरी चुनौती कोष (UCF) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 फरवरी 2026 को ₹1 लाख करोड़ के केंद्रीय कोष के साथ मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य कुल ₹4 लाख करोड़ का शहरी निवेश जुटाना है।
शहरी चुनौती कोष का वित्तपोषण मॉडल क्या है?
UCF 25% केंद्र सरकार अनुदान + 50% बाजार वित्तपोषण मॉडल पर आधारित है, जिसमें शहरों को एक बड़ा हिस्सा निजी या बाजार स्रोतों से जुटाना होगा और केवल 25% केंद्रीय निधि के रूप में दिया जाएगा।
शहरी चुनौती कोष के मुख्य लक्षित शहर कौन से हैं?
UCF मुख्यतः 10 लाख और उससे अधिक जनसंख्या वाले शहरों पर केंद्रित है। द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों को बाजार वित्त तक पहुँचने में मदद के लिए अलग से ₹5,000 करोड़ का क्रेडिट गारंटी कॉर्पस शामिल है।
शहरी चुनौती कोष किन क्षेत्रों पर केंद्रित है?
UCF टिकाऊ शहरी बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें जल आपूर्ति, स्वच्छता, शहरी परिवहन और आवास शामिल हैं। यह स्मार्ट सिटी और AMRUT जैसे मौजूदा मिशनों का पूरक है।
शहरी चुनौती कोष AMRUT जैसी पुरानी शहरी योजनाओं से कैसे अलग है?
AMRUT जैसी अनुदान-प्रधान योजनाओं के विपरीत, UCF शहरों को परिणाम-आधारित और बाजार-आधारित वित्तपोषण की ओर प्रेरित करता है और केंद्रीय निधि प्राप्त करने के लिए निजी पूंजी और मापे जा सकने वाले परिणामों की अपेक्षा रखता है।