राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में "ग्राम सभा में अल्प भागीदारी" पर राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट नई दिल्ली में नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम द्वारा जारी की गई। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, मंत्रालय तथा राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRD&PR) के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद्, शोधकर्ता और विभिन्न पंचायती राज हितधारक उपस्थित रहे। यह रिपोर्ट NIRD&PR द्वारा पंचायती राज मंत्रालय के लिए तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य ग्राम सभा बैठकों में सार्वजनिक भागीदारी को प्रभावित करने वाले कारकों का आकलन करना तथा जमीनी स्तर पर नागरिक सहभागिता को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाना है। यह द्वि-खंडीय रिपोर्ट प्रभावी भागीदारी में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करती है और नीति ढाँचों तथा संस्थागत प्रणालियों को सुदृढ़ करने हेतु साक्ष्य-आधारित नीति सिफारिशें व रणनीतिक दिशानिर्देश प्रस्तुत करती है। इसमें राज्य/केंद्रशासित प्रदेशवार उन कारकों का विवरण है जो ग्राम सभा भागीदारी को प्रभावित करते हैं, आगे की दिशा बताई गई है, तथा भागीदारी बढ़ाने हेतु 10 राज्यों के सर्वोत्तम प्रयोगों को उजागर किया गया है। डॉ. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि ग्राम सभा भारत में जमीनी लोकतंत्र की सबसे सच्ची अभिव्यक्ति है और इसकी जीवंतता यह तय करती है कि शासन के लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितने प्रभावी ढंग से पहुँचते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को सुदृढ़ करने की चुनौतियाँ केवल कम भागीदारी तक सीमित नहीं, बल्कि संस्थागत व प्रणालीगत अवरोधों में निहित हैं। सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने कहा कि यह अध्ययन महिलाओं, युवाओं और हाशिए के समुदायों की भागीदारी बढ़ाने हेतु लक्षित हस्तक्षेप तैयार करने के लिए मूल्यवान साक्ष्य प्रदान करता है। NIRD&PR, हैदराबाद के सह-प्राध्यापक डॉ. अंजन कुमार भांजा ने निष्कर्ष प्रस्तुत किए। यह अध्ययन देश के सबसे बड़े क्षेत्र-आधारित आकलनों में से एक है, जिसमें 26 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और 213 जिलों की लगभग 400 ग्राम पंचायतों में लगभग 7,800 उत्तरदाता शामिल किए गए, जिनमें PESA तथा महिला-हितैषी ग्राम पंचायतें भी सम्मिलित हैं।