ग्रामीण विकास मंत्रालय और बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका ने गया स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की। इसका केंद्र 6 करोड़ लखपति दीदी के राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए कृषि आजीविका, गैर-कृषि आजीविका और प्रबंधन सूचना प्रणाली की रणनीति बनाना था। कार्यशाला के अंत में रणनीति, कार्य-रूपरेखा और वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना तैयार हुई। प्रतिभागियों ने कृषि व गैर-कृषि उद्यमों, मूल्य शृंखलाओं, डिजिटल मंचों, आँकड़ा प्रबंधन, विभागीय तालमेल, उद्यमिता बढ़ाने और महिलाओं की आय में दीर्घकालिक वृद्धि के उपायों पर चर्चा की। कृषि आजीविका, गैर-कृषि आजीविका और प्रबंधन सूचना प्रणाली पर तीन समानांतर तकनीकी सत्रों से पाँच वर्षीय रणनीति की रूपरेखा बनी। इसमें नीतिगत सुधार, संस्थाओं को मजबूत करना, प्राथमिक हस्तक्षेप, आँकड़ों के आधार पर निर्णय, तत्काल निगरानी और राज्यों के आँकड़ों का एकीकरण शामिल था। अगले चरण में उद्यमों की विविधता, मूल्य संवर्धन, बाजार से जुड़ाव, जलवायु के अनुकूल आजीविका, वित्तीय समावेशन, तकनीक और नवाचार पर जोर रहेगा। कार्यशाला में लखपति दीदी डैशबोर्ड के नियमित उपयोग और सामुदायिक संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार 3 करोड़ लखपति दीदी का पिछला राष्ट्रीय लक्ष्य सामूहिक प्रयासों, महिला स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक संस्थाओं और राज्यों के प्रभावी क्रियान्वयन से पूरा हुआ। ज्ञान साझेदारी और संस्थागत सहयोग के लिए बिहार जीविका तथा अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समापन सत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने तीनों तकनीकी धाराओं की अनुशंसाएँ समेटीं तथा 6 करोड़ के लक्ष्य के लिए साझा प्राथमिकताओं, पाँच वर्षीय कार्ययोजना और समयबद्ध क्रियान्वयन पर सहमति जताई।