प्रकाशित: 9 दिसंबर 2025समाचार स्रोतटॉपिक
DoT ने WhatsApp, Telegram और अन्य मैसेजिंग ऐप्स के लिए 90 दिनों में SIM-बाइंडिंग अनिवार्य किया
दूरसंचार विभाग (DoT) ने दूरसंचार साइबर सुरक्षा संशोधन नियम 2025 के तहत WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat सहित प्रमुख मैसेजिंग ऐप्स को SIM से अनिवार्य रूप से जोड़ने के निर्देश जारी किए। ऐप्स को 90 दिनों में (1 मार्च 2026 तक) अनुपालन करना होगा।
निर्देश के अनुसार पंजीकरण के लिए उपयोग किया गया SIM डिवाइस में भौतिक रूप से मौजूद और सक्रिय होना चाहिए। वेब और डेस्कटॉप संस्करणों में हर छह घंटे पर अपने-आप लॉगआउट और नए QR-कोड से लिंकिंग की व्यवस्था करनी होगी। यह कदम गुमनाम घोटालों और 'डिजिटल गिरफ्तारी' धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: मैसेजिंग ऐप्स के लिए दूरसंचार विभाग के सिम-बाइंडिंग आदेश के औचित्य और विवादों की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
दूरसंचार विभाग ने साइबर-सुरक्षा संशोधन नियम 2025 के तहत व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट और समान ऐप्स के लिए 90 दिनों में सिम-बाइंडिंग अनिवार्य की। वेब संस्करणों में हर छह घंटे फिर से प्रमाणीकरण जरूरी किया गया। आदेश का उद्देश्य अनाम घोटालों, डिजिटल गिरफ्तारी और प्रतिरूपण कॉल्स को रोकना है। ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने इसे दूरसंचार अधिनियम 2023 के दायरे से बाहर बताकर चुनौती दी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दूरसंचार विभाग ने प्रमुख मैसेजिंग ऐप्स के लिए क्या अनिवार्य किया?
दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार साइबर सुरक्षा संशोधन नियम, 2025 के तहत प्रमुख मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम-बाइंडिंग अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए।
किन मैसेजिंग ऐप्स के नाम लिए गए और उन्हें कब तक अनुपालन करना है?
निर्देशों में व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, जोश और अरट्टई सहित प्रमुख मैसेजिंग ऐप्स के नाम हैं। इन ऐप्स को 90 दिनों के भीतर, 1 मार्च 2026 तक, अनुपालन करना होगा।
ऐप तक पहुंच के लिए सिम-बाइंडिंग निर्देश में क्या कहा गया है?
मैसेजिंग सेवाओं तक पहुंच तभी मिलेगी, जब पंजीकरण में इस्तेमाल किया गया सिम डिवाइस में भौतिक रूप से मौजूद और सक्रिय हो। वेब और डेस्कटॉप संस्करणों में उपयोगकर्ताओं को हर छह घंटे में अपने-आप लॉग आउट करना होगा और फिर से QR कोड से लिंक करना होगा।
निर्देश में धोखाधड़ी के किन जोखिमों को निशाना बनाया गया और इसे किसने चुनौती दी?
यह कदम भारतीय नंबरों से चलाए जाने वाले अनाम घोटालों, रिमोट डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और सरकारी अधिकारी बनकर की जाने वाली कॉलों पर रोक लगाने के लिए है। मेटा, गूगल और अन्य प्लेटफ़ॉर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने इस निर्देश को दूरसंचार अधिनियम 2023 के अधिकार-क्षेत्र से बाहर बताते हुए चुनौती दी।