राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2025 में एक ही बैच में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 24 न्यायाधीशों की नियुक्ति की। नियुक्त न्यायाधीशों में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक सरन, गरिमा प्रशाद और सुधांशु चौहान शामिल हैं। यह खबर परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और लंबित मामलों के बोझ जैसे शासन से जुड़े मुद्दों को सीधे जोड़ती है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्वीकृत क्षमता 160 न्यायाधीशों की है, इसलिए 24 न्यायाधीशों की एक साथ नियुक्ति केवल नियमित प्रशासनिक सूचना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों का बोझ कम करना है। परीक्षा में यह घटना न्याय तक पहुंच, न्यायिक क्षमता, लंबित मामलों का बोझ और न्यायपालिका की संस्थागत कार्यकुशलता जैसे विषयों से जुड़ सकती है।
स्टैटिक जीके के लिए इसे संविधान के अनुच्छेद 217 से जोड़कर पढ़ना चाहिए। अनुच्छेद 217 के तहत उच्च न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और इसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश, संबंधित राज्य के राज्यपाल तथा, मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति में, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श का प्रावधान है। इसलिए यह समसामयिकी विषय संविधान, न्यायपालिका और शासन के साझा क्षेत्र में आता है।
प्रीलिम्स में संख्या, न्यायालय और नियुक्ति करने वाले संवैधानिक पद से सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। उत्तर लिखते समय इसे न्यायिक सुधार, लंबित मामलों में कमी और न्यायपालिका में नियुक्तियों की प्रक्रिया के छोटे उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
