नवंबर 2024 में बाकू, अज़रबैजान में आयोजित COP29 में भारत ने जलवायु वित्त पर अपना रुख रखा और जलवायु वित्त तथा CBDR-RC सिद्धांत पर दृढ़ता दिखाई।

भारत ने NCQG के रूप में विकसित देशों से प्रति वर्ष $1.3 लाख करोड़ की अपनी मांग दोहराई। भारत का तर्क था कि ग्लोबल साउथ को जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव में अस्तित्व से जुड़ी भारी लागत झेलनी पड़ती है। मंत्री ने COP29 अध्यक्षता पर आरोप लगाया कि उसने NCQG के रूप में $300 अरब/वर्ष के समझौते को जल्दबाज़ी में पारित कराया।

भारत के राष्ट्रीय वक्तव्य में चार स्तंभों पर जोर दिया गया: (1) विभेदित जिम्मेदारी; (2) पर्याप्तता — $300 अरब जलवायु संकट के पैमाने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है; (3) ऐसा वित्त जिसका पहले से भरोसेमंद अंदाज़ा हो — वित्त नया, अतिरिक्त, अनुदान-आधारित होना चाहिए, न कि ऋण; (4) जवाबदेही — प्रतिज्ञाओं की पूर्ति के लिए मजबूत निगरानी तंत्र होना चाहिए।

अनुच्छेद 6 कार्बन बाजार वार्ता भी समानांतर में चल रही थी। भारत ने चेतावनी दी कि विकसित देश विकासशील देशों में सस्ते "ऑफसेट" के सहारे अपनी घरेलू कटौती से बच सकते हैं।

राजस्थान के लिए: राज्य की कृषि अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान से तेज़ी से प्रभावित हो रही है। पर्याप्त जलवायु वित्त राजस्थान में जलसंभर प्रबंधन, फसल बीमा और सौर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर वित्तपोषित कर सकता है।