भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने आई-ड्रोन पहल के तहत यह अध्ययन किया कि ड्रोन से तपेदिक के नमूने पहुंचाने पर दूरदराज और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में जांच की पहुंच कितनी बेहतर हो सकती है। कार्यक्रम पर आधारित यह अध्ययन तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी जिले में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत हुआ। इसमें एआईआईएमएस बिबिनगर और जिला टीबी कार्यालय ने सहयोग किया। अध्ययन में उस पारंपरिक व्यवस्था की तुलना ड्रोन आधारित तरीके से की गई, जिसमें रोगियों को जांच के लिए यात्रा करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-केंद्रों पर थूक के नमूने लिए गए और ड्रोन से तय टीबी जांच प्रयोगशालाओं तक पहुंचाए गए। अध्ययन में 840 प्रतिभागी शामिल थे। ड्रोन से नमूने पहुंचाने की शुरुआत के बाद टीबी जांच में लगने वाला औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया। इससे बीमारी की पुष्टि जल्दी हुई और उपचार संबंधी निर्णय लेने में भी तेजी आई। रोगियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी काफी घटा। जांच के लिए उनकी जेब से होने वाला औसत खर्च पारंपरिक व्यवस्था में लगभग ₹9,451 था, जो ड्रोन वाले चरण में घटकर लगभग ₹91 रह गया। स्रोत के अनुसार, इसकी मुख्य वजह यात्रा खर्च और मजदूरी के नुकसान में कमी तथा घर के पास नमूना देने की सुविधा थी। इस व्यवस्था ने 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 60 उप-केंद्रों और चार टीबी इकाइयों को एक केंद्रीय ढांचे से जोड़ा। स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि देरी घटी, कामकाज बेहतर हुआ और शुरुआती परिचय के बाद समुदायों ने इसे अच्छी तरह अपनाया। अध्ययन ने मौसम, वजन ढोने की सीमा और लगातार प्रशिक्षण की जरूरत को भी महत्वपूर्ण माना। चूंकि निष्कर्ष एक ही जिले के अनुभव पर आधारित हैं, इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल से आगे के फैसलों के लिए और प्रमाण जुटाने की जरूरत बताई गई।
आईसीएमआर अध्ययन: ड्रोन से नमूने पहुंचाने पर सुदूर तेलंगाना में टीबी जांच तेज हो सकती है
तेलंगाना में 840 प्रतिभागियों पर हुए अध्ययन में ड्रोन से टीबी के थूक के नमूने पहुंचाने पर जांच का औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन और रोगी का औसत खर्च लगभग ₹9,451 से घटकर लगभग ₹91 रह गया। एक जिले के इन निष्कर्षों ने व्यापक इस्तेमाल के लिए मौसम, वजन सीमा और प्रशिक्षण की जरूरत भी सामने रखी।
मुख्य तथ्य
- तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी जिले में हुए कार्यक्रम आधारित अध्ययन में 840 प्रतिभागी शामिल थे।
- ड्रोन से नमूने पहुंचाने की शुरुआत के बाद टीबी जांच का औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया।
- रोगियों की जेब से होने वाला औसत खर्च लगभग ₹9,451 से घटकर लगभग ₹91 रह गया।
- इस व्यवस्था ने 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 60 उप-केंद्रों और चार टीबी इकाइयों को जोड़ा।
- व्यापक इस्तेमाल के लिए मौसम, वजन ढोने की सीमा और लगातार प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माना गया।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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तेलंगाना में हुए आईसीएमआर अध्ययन के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए: 1. ड्रोन से नमूने पहुंचाने की शुरुआत के बाद टीबी जांच का औसत समय 5 दिन से बढ़कर 15 दिन हो गया। 2. ड्रोन आधारित व्यवस्था में रोगियों को गांव के पास थूक का नमूना देने के बजाय जांच केंद्रों तक जाना पड़ता था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है?
दोनों कथन गलत हैं। जांच का औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया। ड्रोन वाली व्यवस्था में रोगी दूर स्थित जांच केंद्र जाने के बजाय गांव के पास स्वास्थ्य केंद्र पर थूक का नमूना दे सकते थे।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह अध्ययन कहां हुआ?
यह तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी जिले में हुआ।
ड्रोन से नमूने पहुंचाने पर जांच के समय में क्या बदलाव आया?
टीबी जांच का औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया।
रोगियों के खर्च में क्या बदलाव आया?
जेब से होने वाला औसत खर्च लगभग ₹9,451 से घटकर लगभग ₹91 रह गया।
व्यापक इस्तेमाल में किन बातों पर ध्यान देना होगा?
अध्ययन ने मौसम, वजन ढोने की सीमा और लगातार प्रशिक्षण की जरूरत बताई।
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