अंतरिक्ष एवं रक्षा: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, उपग्रह, प्रक्षेपण यान, सुदूर संवेदन, प्रक्षेपास्त्र, ड्रोन तकनीक, रासायनिक/जैविक हथियार
मुख्य तथ्य
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन — स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई; इसने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति का स्थान लिया
- PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) — ISRO का भरोसेमंद प्रक्षेपण यान; 60+ सफल उड़ानें — 34 देशों के 342 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित
- LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) — भारत का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान — GTO पर 4 t, LEO पर 10 t क्षमता
- चंद्रयान-3 — 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग
- आदित्य-L1 — भारत का पहला सौर वेधशाला मिशन; 2 सितंबर 2023 को PSLV-C57 से प्रक्षेपित — 6 जनवरी 2024 को L1 बिंदु (15 लाख km) पर पहुँचा
मुख्य बिंदु
- 1
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
- स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई; इसने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति का स्थान लिया
- प्रमुख केंद्र: बेंगलुरु में अंतरिक्ष केंद्र, अहमदाबाद में स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर और तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र
- भारत का पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को थुम्बा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से छोड़ा गया; उसमें सोडियम-वाष्प पेलोड था
- 2
PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान)
- ISRO का भरोसेमंद प्रक्षेपण यान; 60+ सफल उड़ानें
- 34 देशों के 342 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित
- चंद्रयान-1 (2008), MOM (2013) इसी से प्रक्षेपित
- 3
LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3)
- भारत का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान
- GTO पर 4 t, LEO पर 10 t क्षमता
- OneWeb उपग्रह (2022–23), चंद्रयान-3 (2023), गगनयान में उपयोग
- 4
चंद्रयान-3
- 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग
- विक्रम लैंडर + प्रज्ञान रोवर (एक चंद्र दिवस ~14 पृथ्वी दिवस तक संचालित)
- भारत चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा और दक्षिणी ध्रुव पर पहला देश
- 5
आदित्य-L1
- भारत का पहला सौर वेधशाला मिशन; 2 सितंबर 2023 को PSLV-C57 से प्रक्षेपित
- 6 जनवरी 2024 को L1 बिंदु (15 लाख km) पर पहुँचा
- सौर कोरोना, CME और सौर वायु का अध्ययन; 7 पेलोड
- 6
गगनयान
- भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन; 3 दिन, 400 km LEO
- 4 IAF परीक्षण पायलट: प्रशांत बालकृष्णन नायर, अंगद प्रताप, अजीत कृष्णन, शुभांशु शुक्ला
- TV-D1 परीक्षण: अक्टूबर 2023; लक्ष्य: 2025 में क्रू मिशन
- 7
मंगलयान (MOM)
- 5 नवंबर 2013 प्रक्षेपित; मंगल कक्षा 24 सितंबर 2014
- भारत प्रथम प्रयास में मंगल पर पहुँचने वाला विश्व का एकमात्र और एशिया का पहला देश
- बजट: ₹450 करोड़ (~7.4 करोड़ डॉलर)
- 8
IGMDP (एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम)
- 1983 में डॉ. APJ अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू; पाँच मिसाइल: पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल, नाग
- अग्नि की मारक क्षमता: 700 से 8,000+ km
- ब्रह्मोस (भारत-रूस, 1998) — विश्व की सबसे तेज़ क्रूज मिसाइल (~Mach 2.8)
- 9
सुदूर संवेदन उपग्रह
- बिना संपर्क के पृथ्वी का डेटा संग्रह
- RESOURCESAT (LISS, 5.8 m): कृषि, वन, आपदा निगरानी
- CARTOSAT-3 (0.25 m — सर्वश्रेष्ठ रिज़ॉल्यूशन): रक्षा और नगर मानचित्रण
- RISAT: सर्व-मौसम, दिन-रात राडार निगरानी
- 10
NavIC (भारतीय नेविगेशन नक्षत्र)
- भारत की स्वदेशी GPS प्रणाली; 7 उपग्रह
- सटीकता: < 20 मीटर (भारत + 1,500 km क्षेत्र में)
- 2023 से सभी स्मार्टफोन में NavIC अनिवार्य (BIS मानक)
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रासायनिक हथियार
- विषैले रसायनों से हत्या या अक्षमता; WMD की श्रेणी में
- प्रकार: तंत्रिका कारक (सारिन, VX), फफोला कारक (मस्टर्ड गैस), रक्त कारक (साइनाइड)
- रासायनिक हथियार सम्मेलन (CWC), 1993 के तहत प्रतिबंधित; भारत हस्ताक्षरकर्ता
- OPCW प्रवर्तन करता है — नोबेल शांति पुरस्कार 2013
- 12
जैविक हथियार
- रोगाणुओं (बैक्टीरिया, वायरस, विषाक्त पदार्थ) का हथियार के रूप में उपयोग
- जैविक हथियार सम्मेलन (BWC), 1972 — WMD की पूरी श्रेणी पर पहला अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध
- प्रमुख खतरे: एंथ्रेक्स, चेचक, प्लेग, रिसिन, बोटुलिनम विष
- भारत ने 1974 में BWC का अनुसमर्थन किया
- 13
ड्रोन तकनीक
- ड्रोन नीति 2021 (उदार) और PLI योजना (₹120 करोड़): घरेलू निर्माण को बढ़ावा
- प्रमुख निर्माता: ideaForge (सबसे बड़ा), Garuda Aerospace, Drona Aviation
- सेना: Heron, Rustom-2 निगरानी ड्रोन; DRDO: Abhyas, Nirbhay
- 14
ISRO की व्यावसायिक एवं नीति संरचना
- NSIL (2019) — ISRO की व्यावसायिक शाखा; छोटे उपग्रह प्रक्षेपण, OneWeb अनुबंध
- IN-SPACe (2020) — निजी अंतरिक्ष क्षेत्र नियामक संस्था
- अंतरिक्ष नीति 2023 — निजी प्रक्षेपण यान और उपग्रह निर्माण की अनुमति
परिचय और संदर्भ
यह अध्याय २०२६ की परीक्षा के लिए भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और रक्षा-प्रौद्योगिकी को एक साथ पढ़ाता है, क्योंकि चंद्रयान-३, आदित्य-एल१, गगनयान, मिसाइलों और ड्रोन नीति से सीधे छोटे तथा मध्यम उत्तर बनते हैं। टॉपिक ७२ में भारत की अंतरिक्ष संस्था इसरो और रक्षा संस्था डीआरडीओ/मिसाइल क्षेत्र की उपलब्धियाँ शामिल हैं; दोनों नियमित रूप से परीक्षा में पूछे जाते हैं। २०२६ की परीक्षा में चंद्रयान-३ का अगस्त २०२३ वाला ऐतिहासिक क्षण, गगनयान का आगामी मानव मिशन, आदित्य-एल१ का सौर अध्ययन, और ड्रोन नीति जैसे २०२२ के बाद के विकास महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे पुराने प्रश्न-पत्रों में पूरी तरह नहीं आए थे।
विषय-क्षेत्र की सटीकता
- विषय-क्षेत्र: भारत — इस टॉपिक में भारत-विशिष्ट तथ्य आवश्यक हैं: मिशन तिथियाँ, उपग्रह नाम, मिसाइल नाम, नीति वर्ष, बजट और परीक्षण।
- कक्षीय यांत्रिकी की सामान्य जानकारी अलग भौतिकी/विज्ञान अध्याय से जुड़ती है; विक्रम साराभाई या डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जीवनी अलग व्यक्तित्व/विज्ञान इतिहास संदर्भ में आती है।
- यह टॉपिक परिचालन कार्यक्रमों, मिशनों और परिणामों पर केंद्रित है। इसलिए उत्तर में “किसने क्या बनाया” से अधिक “कब प्रक्षेपित हुआ, क्या परिणाम आया, परीक्षा में इसका उपयोग कैसे होगा” लिखना चाहिए।
- रासायनिक और जैविक हथियार वैचारिक हैं, लेकिन भारत के संदर्भ में भी पूछे जाते हैं: भारत का अनुमोदन, ओपीसीडब्ल्यू की भूमिका, सत्यापन व्यवस्था और जैविक हथियार कन्वेंशन की कमजोरी।
- इस अध्याय में तथ्य बहुत हैं, इसलिए हर उत्तर में एक तारीख, एक संस्था और एक उपयोग लिखने की आदत बनानी चाहिए; यही उत्तर को सामान्य ज्ञान से परीक्षा-योग्य उत्तर बनाता है।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M चंद्रयान-3 मिशन में भारत की उपलब्धियाँ बताइए। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग क्यों महत्त्वपूर्ण है?
आदर्श उत्तर
चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विश्व की पहली सॉफ्ट लैंडिंग की (69.37° S)। भारत 4था देश और दक्षिणी ध्रुव पर पहला। प्रज्ञान रोवर ने पहली बार इस क्षेत्र में सल्फर, लौह आदि की इन-सिटू पुष्टि की। महत्त्व: दक्षिणी ध्रुव की छाया में जल-बर्फ है — भावी चंद्र अड्डों और रॉकेट ईंधन के लिए मूल्यवान।
~50 शब्द • 5 अंक
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