प्रकाशित: 5 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
ISRO GISAT-1A के प्रक्षेपण की तैयारी में; भारत का पहला भू-स्थिर पृथ्वी अवलोकन उपग्रह
ISRO ने GISAT-1A (EOS-05) को ले जाने वाले GSLV-F17 मिशन की तैयारी की घोषणा की। यह पृथ्वी अवलोकन के लिए भारत का पहला भू-स्थिर उपग्रह होगा। 2.2 टन का यह उपग्रह 36,000 किमी की भू-स्थिर कक्षा से हर 5 मिनट में भारतीय उपमहाद्वीप की लगातार निगरानी करेगा। NOTAM 20 फरवरी से 5 मार्च तक है।
GISAT-1A उस GISAT-1 (EOS-03) का प्रतिस्थापन है, जो अगस्त 2021 में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण की खराबी के कारण खो गया था। उपग्रह में मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग की क्षमता होगी, जिससे आपदा निगरानी, चक्रवात ट्रैकिंग, बादल फटने की भविष्यवाणी और कृषि फसलों की निगरानी में मदद मिलेगी। राजस्थान के लिए यह टिड्डी दलों पर नजर रखने और सूखे के आकलन में लाभकारी होगा।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: इसरो के आगामी जीसैट-वनए भू-स्थिर पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के परिचालन महत्व पर चर्चा करें, विशेषकर राजस्थान के लिए प्रासंगिक आपदा निगरानी और कृषि अनुप्रयोगों के संदर्भ में।
उत्तर (50 शब्द):
इसरो का जीएसएलवी-एफ17, 20 फरवरी से 5 मार्च 2026 के बीच जीसैट-वनए, भारत का पहला भू-स्थिर पृथ्वी अवलोकन उपग्रह प्रक्षेपित करेगा। 36,000 किलोमीटर पर 2.2 टन का यह उपग्रह, बहु-वर्णक्रमीय और अति-वर्णक्रमीय पेलोड से हर पाँच मिनट लगातार निगरानी करेगा। यह जीएसएलवी-एफ10 की अगस्त 2021 क्रायोजेनिक विफलता में खोए जीसैट-वन का प्रतिस्थापन है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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GISAT-1A (EOS-05) 2021 में GSLV की विफलता में खोए किस उपग्रह का प्रतिस्थापन है?
व्याख्या · सही उत्तर BGISAT-1A, GISAT-1 (EOS-03) का प्रतिस्थापन है, जो अगस्त 2021 में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण की खराबी के कारण GSLV-F10 की विफलता में खो गया था। GISAT-1A भू-स्थैतिक कक्षा से लगभग वास्तविक समय में लगातार निगरानी करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
GISAT-1A EOS-05 क्या है और इसे भारत का पहला भू-स्थिर पृथ्वी अवलोकन उपग्रह क्यों कहते हैं?
**GISAT-1A (EOS-05)** भारत का **पहला समर्पित भू-स्थिर पृथ्वी अवलोकन उपग्रह** है, जो **36,000 किमी** की ऊंचाई पर स्थित होगा। ध्रुवीय कक्षा वाले उपग्रहों के विपरीत, यह भारतीय उपमहाद्वीप की **हर 5 मिनट में लगातार, लगभग वास्तविक समय की निगरानी** कर सकेगा और इसे **ISRO** के **GSLV-F17** से प्रक्षेपित किया जाएगा।
आपदा प्रबंधन और कृषि के लिए ISRO GISAT-1A की मुख्य क्षमताएं क्या हैं?
**GISAT-1A (EOS-05)** में **मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग पेलोड** है, जिससे **आपदा निगरानी** (बाढ़, जंगल की आग), **चक्रवात ट्रैकिंग**, **बादल फटने की भविष्यवाणी** और **कृषि फसल निगरानी** की जा सकेगी। **राजस्थान** के लिए यह विशेष रूप से **टिड्डी ट्रैकिंग** और **सूखा मूल्यांकन** में सहायक होगा।
ISRO GISAT-1A क्यों लॉन्च कर रहा है और मूल GISAT-1 EOS-03 का क्या हुआ था?
**GISAT-1A**, **GISAT-1 (EOS-03)** का प्रतिस्थापन है, जो **अगस्त 2021** में **GSLV-F10** के **क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में खराबी** के कारण खो गया था। प्रतिस्थापन मिशन में **GSLV-F17** का उपयोग होगा और इसकी **NOTAM अवधि 20 फरवरी से 5 मार्च 2026** है।
GISAT-1A भारत की कितनी बार निगरानी करेगा और यह किस कक्षा में होगा?
**GISAT-1A (EOS-05)** को **36,000 किमी ऊंचाई पर भू-स्थिर कक्षा** में रखा जाएगा, जिससे यह **भारतीय उपमहाद्वीप की हर 5 मिनट में** निरंतर निगरानी कर सकेगा। इतनी कम अवधि में बार-बार मिलने वाली जानकारी समय पर आपदा प्रतिक्रिया, चक्रवात ट्रैकिंग और कृषि निगरानी में मदद करेगी।
GISAT-1A राजस्थान में टिड्डी और सूखा निगरानी में कैसे मदद करेगा?
**GISAT-1A** राजस्थान को भू-स्थिर कक्षा से लगातार उच्च-आवृत्ति इमेजिंग देगा, जिससे **थार रेगिस्तान में टिड्डी की रीयल-टाइम ट्रैकिंग** और वनस्पति सूचकांकों की निगरानी के आधार पर **सूखा मूल्यांकन** किया जा सकेगा।