2070 तक भारतीय शहरों में लगभग एक अरब लोगों के रहने का अनुमान है, और इन शहरों के सामने बाढ़, लू, चक्रवात तथा भूकंप के बढ़ते खतरे हैं। अनियोजित शहरीकरण और अपर्याप्त जल निकासी के कारण दो-तिहाई शहरी निवासी जलवायु आपदाओं के प्रति संवेदनशील हैं। 2070 तक शहरी क्षेत्रों में आर्थिक नुकसान $30 अरब से अधिक हो सकता है। विशेषज्ञ जलवायु जोखिम आकलन, हरित अवसंरचना और आपदा-प्रतिरोधी भवन संहिताओं को नीतिगत प्राथमिकता बनाने पर जोर दे रहे हैं।