2070 तक भारतीय शहरों में लगभग एक अरब लोगों के रहने का अनुमान है, और इन शहरों के सामने बाढ़, लू, चक्रवात तथा भूकंप के बढ़ते खतरे हैं। अनियोजित शहरीकरण और अपर्याप्त जल निकासी के कारण दो-तिहाई शहरी निवासी जलवायु आपदाओं के प्रति संवेदनशील हैं। 2070 तक शहरी क्षेत्रों में आर्थिक नुकसान $30 अरब से अधिक हो सकता है। विशेषज्ञ जलवायु जोखिम आकलन, हरित अवसंरचना और आपदा-प्रतिरोधी भवन संहिताओं को नीतिगत प्राथमिकता बनाने पर जोर दे रहे हैं।
जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन की जरूरत: भारतीय शहरों पर बढ़ता आपदा जोखिम
भारतीय शहरों में जलवायु आपदाओं का जोखिम बढ़ रहा है; 2070 तक 3,000 करोड़ डॉलर के नुकसान का अनुमान है; जलवायु-अनुकूल मास्टर प्लान की मांग की जा रही है।
मुख्य तथ्य
- भारत के शहरी क्षेत्रों में चरम मौसमी घटनाओं से जलवायु आपदाओं का जोखिम बढ़ रहा है।
- शहरी जलवायु घटनाओं से 2070 तक 3,000 करोड़ डॉलर के आर्थिक नुकसान का अनुमान।
- विशेषज्ञों ने भारतीय शहरों के लिए जलवायु-अनुकूल मास्टर प्लान की मांग की।
- अनियोजित तेज शहरीकरण से बाढ़ और लू की चपेट में आने का खतरा बढ़ता है।
- शहरी विकास नीतियों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एकीकृत करना आवश्यक है।
- स्मार्ट सिटी पहलों में जलवायु अनुकूलन मुख्य घटक होना चाहिए।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
हाल की जलवायु जोखिम रिपोर्टों के अनुसार, 2070 तक भारत की शहरी आबादी का कितना अनुपात बाढ़ के प्रति संवेदनशील होने का अनुमान है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2070 तक भारत की शहरी आबादी लगभग 1 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें दो-तिहाई निवासी बाढ़ के प्रति संवेदनशील होंगे।
स्रोत: स्रोत विवरण उपलब्ध नहीं है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2070 तक भारतीय शहरों को जलवायु संबंधी घटनाओं से कितने आर्थिक नुकसान का अनुमान है?
अनुमान के अनुसार 2070 तक भारत के शहरी क्षेत्रों को बाढ़ और लू जैसी मौसम की चरम घटनाओं से लगभग 3,000 करोड़ डॉलर का आर्थिक नुकसान होगा।
बिना नियोजन के शहरीकरण जलवायु जोखिम क्यों बढ़ाता है?
एकीकृत नियोजन के बिना तेज शहरीकरण होने पर जल निकासी, हरित आवरण और गर्मी झेलने वाले निर्माण जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी रह जाती है। इससे अनौपचारिक बस्तियों में बाढ़ और लू का खतरा अधिक हो जाता है।
भारतीय शहरों में जलवायु जोखिम कम करने के लिए विशेषज्ञों ने क्या सिफारिश की है?
विशेषज्ञों ने भारतीय शहरों के लिए जलवायु-अनुकूल मास्टर प्लान बनाने की माँग की है, जिनमें आपदा जोखिम न्यूनीकरण को शहरी विकास नीतियों में शामिल किया जाए और स्मार्ट सिटी पहलों में जलवायु अनुकूलन को मुख्य घटक बनाया जाए।
भारतीय शहरी नीति में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को कैसे शामिल किया जाना चाहिए?
आपदा जोखिम न्यूनीकरण को शहरी मास्टर प्लान, भवन संहिताओं और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि बाढ़ से सुरक्षित अवसंरचना और गर्मी से निपटने की कार्ययोजनाएँ सभी शहरी विकास निर्णयों का हिस्सा बनें।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें