कॉप30 में फ्रांस और ब्राजील की अगुवाई वाली ब्लू एनडीसी चैलेंज पहल को 17 देशों का समर्थन मिला। फ्रांस, ब्राजील, बेल्जियम, कनाडा और सिंगापुर जैसे देशों की भागीदारी यह दिखाती है कि जलवायु नीति में समुद्र को केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि उत्सर्जन कटौती, ऊर्जा, व्यापार और आजीविका से जुड़ा रणनीतिक क्षेत्र माना जा रहा है। एनडीसी यानी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान पेरिस समझौते के तहत देशों की जलवायु कार्ययोजना होते हैं; इसलिए इनमें समुद्र-आधारित उपायों को शामिल करना वैश्विक जलवायु शासन के लिए महत्वपूर्ण है।

समुद्र-आधारित जलवायु उपाय 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य के भीतर रहने के लिए जरूरी वैश्विक उत्सर्जन कटौती में 35% तक योगदान दे सकते हैं। इस पहल के प्रमुख क्षेत्र समुद्री और तटीय पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण और बहाली, अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा, जहाजरानी का विकार्बनीकरण, समुद्री उद्योगों का अनुकूलन तथा टिकाऊ मत्स्य और जलीय कृषि हैं। परीक्षा में इससे पेरिस समझौते के एनडीसी, नीली अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संक्रमण को समुद्री नीति के उदाहरण के साथ समझाया जा सकता है।

भारत के लिए इसका महत्व इसलिए बढ़ता है क्योंकि भारत की संशोधित तटरेखा 11,098.81 किलोमीटर है और सागरमाला तथा नीली अर्थव्यवस्था से जुड़े लक्ष्य समुद्री अवसंरचना, बंदरगाह-आधारित विकास और व्यापार से जुड़े हैं। राजस्थान समुद्र तट वाला राज्य नहीं है, फिर भी गुजरात के बंदरगाहों से होने वाले मत्स्य व्यापार और समुद्री उत्पाद निर्यात के कारण समुद्र-जलवायु नीतियों का अप्रत्यक्ष असर राज्य की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। RAS और UPSC में यह तथ्य प्रीलिम्स के लिए आँकड़ों और मुख्य परीक्षा के लिए जलवायु शासन, संघीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के विश्लेषण में उपयोगी है।