प्रकाशित: 15 नवंबर 2025PIBविज्ञान-प्रौद्योगिकी
ISRO चंद्रयान-3 प्रोपल्शन मॉड्यूल पृथ्वी कक्षा मिशन के बाद चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र में वापस आया
चंद्रयान-3 प्रोपल्शन मॉड्यूल (PM) ने 2023-24 में पृथ्वी की कक्षा में अभूतपूर्व वापसी के बाद, कक्षा बदलने की कई प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक पूरी कीं और चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र (SOI) में फिर से प्रवेश किया है।
चंद्रयान-3 जुलाई 2023 में लॉन्च हुआ और 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर ऐतिहासिक सॉफ्ट-लैंडिंग हासिल की, जिससे भारत चंद्र दक्षिण ध्रुव के निकट उतरने वाला पहला देश बना।
प्रोपल्शन मॉड्यूल में शेप उपकरण लगा है, जो चंद्र दूरी से पृथ्वी के वायुमंडल और विशेषताओं के बारे में वैज्ञानिक डेटा एकत्र कर रहा है — यानी चंद्रमा को पृथ्वी के अध्ययन के लिए अवलोकन बिंदु की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
चंद्रमा के SOI में पुनः प्रवेश ISRO की गहरे अंतरिक्ष नेविगेशन, बहु-पिंड कक्षीय यांत्रिकी और मिशन विस्तार में बढ़ती क्षमता को दिखाता है — चंद्रयान-4, LUPEX और गागनयान से जुड़े चंद्र मिशनों के लिए यह महत्वपूर्ण है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: इसरो के चंद्रयान-3 प्रोपल्शन मॉड्यूल का चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र में लौटना गहरे अंतरिक्ष की क्षमता दर्शाता है। भावी चंद्र और नमूना-वापसी मिशनों के निहितार्थों की परीक्षा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
जुलाई 2023 में प्रक्षेपित चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्र दक्षिणी ध्रुव के निकट विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ सॉफ्ट-लैंडिंग की। प्रोपल्शन मॉड्यूल को पृथ्वी की कक्षा में लौटाया गया, फिर उसने चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र में पुनः प्रवेश किया। शेप उपकरण चंद्र दूरी से पृथ्वी का अवलोकन करता है। यह चंद्रयान-4 नमूना-वापसी और लूपेक्स जैसे अभियानों के लिए मार्गदर्शन देता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंद्रयान-3 प्रोपल्शन मॉड्यूल के चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र में पुनः प्रवेश का क्या महत्व है?
यह ISRO की गहरे अंतरिक्ष नेविगेशन और बहु-पिंड कक्षीय यांत्रिकी में बढ़ती क्षमता दिखाता है। एक अभूतपूर्व पृथ्वी कक्षा प्रयोग के बाद इससे मिशन की उपयोगिता भी बढ़ी।
चंद्रयान-3 प्रोपल्शन मॉड्यूल कौन सा उपकरण लेकर गया है और यह क्या अध्ययन करता है?
प्रोपल्शन मॉड्यूल में SHAPE उपकरण लगा है, जो चंद्रमा की दूरी से पृथ्वी के वायुमंडल और विशेषताओं का अध्ययन करता है।
प्रोपल्शन मॉड्यूल को पृथ्वी की कक्षा में वापस लाना क्यों महत्वपूर्ण था?
यह एक अभूतपूर्व नेविगेशन प्रयोग था, जिसमें जटिल बहु-पिंड प्रक्षेपवक्र (पृथ्वी-चंद्रमा) में प्रणोदन और मार्गदर्शन प्रणालियों का परीक्षण किया गया।
चंद्रयान-3 ने अगस्त 2023 में क्या ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की?
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में भारत की पहली सॉफ्ट-लैंडिंग हासिल की।
RAS/UPSC परीक्षाओं के लिए यह क्यों प्रासंगिक है?
यह ISRO मिशन की संरचना, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियां, गहरे अंतरिक्ष नेविगेशन और भारत के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग (JAXA के साथ LUPEX) को शामिल करता है।