प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27-28 दिसंबर 2025 को दिल्ली में मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। पूरे सम्मेलन की अवधि 26-28 दिसंबर 2025 थी और इसका व्यापक विषय "विकसित भारत के लिए मानव पूंजी" रखा गया। परीक्षा की दृष्टि से यह खबर केवल एक सम्मेलन की तारीख याद रखने वाली सूचना नहीं है, बल्कि सहकारी संघवाद, केंद्र-राज्य समन्वय और विकास-प्रशासन की प्रक्रिया को समझने का उदाहरण है।
सम्मेलन ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल शासन और सतत विकास जैसी राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर संरचित और निरंतर संवाद से केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत किया। प्रधानमंत्री की सहकारी संघवाद की दृष्टि के तहत यह ऐसा फोरम है जहां केंद्र और राज्य मिलकर साझा विकास एजेंडा बनाते हैं। मानव पूंजी पर फोकस का अर्थ है कि जनसंख्या को केवल जनसांख्यिकीय लाभांश के रूप में देखने के बजाय शिक्षा, कौशल और भविष्य के रोजगार से जोड़कर विकास की रणनीति बनाना।
चर्चा के पांच मुख्य क्षेत्र प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल, उच्च शिक्षा, खेल और सह-पाठ्य गतिविधियां रहे। विशेष सत्रों में राज्यों में विनियमन घटाना, शासन में तकनीक, स्मार्ट आपूर्ति श्रृंखला और बाजार संपर्क के लिए एग्रीस्टैक, एक राज्य-एक विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य, आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी, तथा वामपंथी उग्रवाद के बाद की योजना शामिल रही। भोजन के दौरान हुई चर्चाओं में विरासत और पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटलीकरण तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में आयुष ज्ञान के एकीकरण पर भी चर्चा हुई।
RAS और UPSC प्रारंभिक परीक्षा में यह विषय समसामयिकी, शासन और योजनाओं से जुड़ सकता है। मुख्य परीक्षा में इसे सहकारी संघवाद, नीति-निर्माण में राज्यों की भूमिका, मानव पूंजी निर्माण, डिजिटल शासन और समावेशी विकास के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
