रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 सितंबर 2025 को पूर्व सैनिक कल्याण पर राष्ट्रीय सम्मेलन 2025 का उद्घाटन किया। यह दो दिवसीय सम्मेलन पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने "विकसित भारत और पूर्व सैनिक कल्याण" थीम पर आयोजित किया। कार्यक्रम का फोकस पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़ी पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास नीतियों की समीक्षा पर था।
भारत में लगभग 33 लाख पूर्व सैनिक और 6 लाख रक्षा पेंशनभोगी हैं। इसलिए यह विषय केवल रक्षा प्रशासन तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक सुरक्षा, सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन, पुनर्वास और केंद्र-राज्य समन्वय से भी जुड़ता है। सम्मेलन में राज्य सैनिक बोर्डों और जिला सैनिक बोर्डों की भूमिका को भी महत्व मिला, क्योंकि ये संस्थाएं पूर्व सैनिकों तक योजनाओं को स्थानीय स्तर पर पहुंचाने में मदद करती हैं। बेहतर काम करने वाले सैनिक बोर्डों और योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने की यह पहल भी सेवा पहुंचाने वाली व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश देती है।
परीक्षा की दृष्टि से यह अपडेट शासन और रक्षा कल्याण के संगम को समझने के लिए उपयोगी है। UPSC और RAS जैसी परीक्षाओं में इससे जुड़ा प्रश्न कल्याणकारी राज्य, प्रशासनिक समन्वय, रक्षा कर्मियों के पुनर्वास, स्वास्थ्य सुरक्षा और पेंशन व्यवस्था के संदर्भ में पूछा जा सकता है। स्टैटिक जीके में पूर्व सैनिक कल्याण विभाग, सैनिक बोर्डों, पुनर्वास तंत्र और रक्षा मंत्रालय के सामाजिक-कल्याण कार्यों को समसामयिकी से जोड़कर पढ़ना चाहिए। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण दिखाता है कि सशस्त्र बलों की सेवा के बाद भी राज्य की जवाबदेही समाप्त नहीं होती; नीति का लक्ष्य सम्मान, सुविधा और पुनर्वास को साथ लेकर चलना है।
