पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 23 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश में हस्तिनापुर (बारहसिंगा) वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर 408.7 वर्ग किलोमीटर के पारिस्थितिकी संवेदी क्षेत्र (ESZ) की अधिसूचना जारी की। इसके साथ हितधारकों के बीच एक दशक से चल रही प्रक्रिया को औपचारिक रूप मिला। अधिसूचित क्षेत्र उत्तर प्रदेश के पाँच जिलों — मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, हापुड़, बिजनौर और अमरोहा — के 307 गाँवों में फैला है। इसमें गंगा का बाढ़ क्षेत्र भी आता है, जहाँ दलदली हिरण (बारहसिंगा), खुर वाले कई अन्य स्तनधारी, घड़ियाल और अनेक प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। अधिसूचना के अनुसार इस संरक्षित क्षेत्र में लगभग 41 स्तनधारी, 373 पक्षी, 36 सरीसृप और 280 से अधिक पादप प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ESZ की सीमा में वाणिज्यिक खनन, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, बड़े पैमाने की पनबिजली परियोजनाओं और बड़े निर्माण कार्यों को नियंत्रित किया जाता है। इसका उद्देश्य सख्ती से संरक्षित अभयारण्य और लोगों के उपयोग वाले आसपास के बड़े क्षेत्र के बीच ऐसा संक्रमण क्षेत्र बनाए रखना है, जहाँ संरक्षण संबंधी पाबंदियाँ धीरे-धीरे कम हों। स्थानीय समुदायों को खेती और आवासीय उपयोग जारी रखने की अनुमति है। इन पाँच जिलों में से किसी एक के जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति नियमों के पालन की देखरेख करेगी और क्षेत्रीय मास्टर प्लान के तहत अनुमत गतिविधियों को मंज़ूरी देगी। यह मास्टर प्लान दो वर्ष के भीतर तैयार किया जाना है। यह अधिसूचना दलदली हिरण (रूसर्वस डुवॉसेली डुवॉसेली) के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह उत्तर प्रदेश का राज्य पशु है और वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में शामिल है। इससे इस पूरे क्षेत्र को टाइगर रिज़र्व घोषित करने का आधार भी मज़बूत होने की उम्मीद है। यह क्षेत्र भी उन पारिस्थितिकी संवेदी क्षेत्रों में शामिल है जिन्हें MoEFCC ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया है। ये अधिसूचनाएँ संरक्षित क्षेत्रों के चारों ओर सामान्य रूप से 1 किमी का पारिस्थितिकी संवेदी क्षेत्र रखने संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप हैं।