राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए 24 न्यायाधीशों की नियुक्ति की और 27 सितंबर 2025 को इन नए न्यायाधीशों ने शपथ ली। नियुक्त न्यायाधीशों में विवेक सरन, गरिमा प्रशाद और सुधांशु चौहान जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल थे। यह नियुक्ति एक ही बैच में हुई, इसलिए यह हाल के वर्षों में एक ही दिन हुई सबसे बड़ी न्यायिक नियुक्तियों में गिनी गई।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसकी स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 160 है और इसे स्वीकृत संख्या के आधार पर देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय माना जाता है। 24 नए न्यायाधीशों के शपथ लेने के बाद न्यायालय की कार्यरत संख्या 110 तक पहुँची, फिर भी 50 पद खाली रहे। इससे साफ़ दिखता है कि नियुक्ति बड़ी होने के बावजूद न्यायिक रिक्तियों और लंबित मामलों की चुनौती तुरंत समाप्त नहीं होती।

उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति के नाम से होती है और रिपोर्ट्स के अनुसार ये नियुक्तियाँ भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद की गईं। प्रारंभिक परीक्षा में न्यायालय, नियुक्तियों की संख्या, स्वीकृत संख्या और नियुक्त न्यायाधीशों के नाम पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे न्यायिक क्षमता, लंबित मामलों, न्याय तक पहुँच और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है। RAS, UPSC और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में 24 नियुक्तियाँ, 160 स्वीकृत पद और 50 शेष रिक्तियाँ याद रखने योग्य बिंदु हैं। स्टैटिक जीके के लिए उच्च न्यायालयों की संरचना, स्वीकृत संख्या और न्यायपालिका में रिक्तियों का संबंध भी याद रखने योग्य है।