भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने 17 फरवरी 2026 को पर्याप्त जाँच के बिना एआई उपकरणों से तैयार याचिकाएँ दाखिल करने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई। न्यायालय ने कहा कि एआई से तैयार कानूनी दस्तावेज़ों में तथ्यात्मक गलतियाँ और मामलों के गढ़े हुए उद्धरण हो सकते हैं।

यह टिप्पणी उस सुनवाई के दौरान आई, जिसमें पीठ को दाखिल याचिका में एआई से गढ़ी हुई सामग्री मिली। न्यायालय ने भारतीय बार परिषद से कानूनी पेशे में एआई के ज़िम्मेदार उपयोग के लिए दिशानिर्देश बनाने पर विचार करने को कहा। उसने इस बात पर भी बल दिया कि सभी दाखिल दस्तावेज़ों की सटीकता और प्रामाणिकता के लिए वकील व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की अदालतें गढ़े हुए उद्धरणों वाली एआई से तैयार कानूनी दलीलें दाखिल करने वाले वकीलों को पहले ही दंडित कर चुकी हैं।