सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की AI से तैयार याचिकाओं पर चिंता जताई
Aसीधा उत्तर
SC ने फर्जी उद्धरणों वाली AI-निर्मित याचिकाओं पर चिंता जताई; 27 फरवरी के एक अलग आदेश में भारतीय बार काउंसिल को नोटिस जारी हुआ।
मुख्य तथ्य
भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने 17 फरवरी 2026 को पर्याप्त जाँच के बिना एआई से तैयार याचिकाएँ दाखिल करने वाले वकीलों पर चिंता जताई।
न्यायालय ने कहा कि एआई से तैयार कानूनी दस्तावेज़ों में तथ्यात्मक गलतियाँ और मामलों के गढ़े हुए उद्धरण हो सकते हैं; यह एआई से गढ़ी हुई सामग्री का उदाहरण है।
न्यायालय ने भारतीय बार परिषद से कानूनी पेशे में एआई के ज़िम्मेदार उपयोग के लिए दिशानिर्देश बनाने पर विचार करने को कहा।
सभी दाखिल दस्तावेज़ों की सटीकता और प्रामाणिकता के लिए वकील व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार हैं।
अमेरिका और ब्रिटेन की अदालतें गढ़े हुए उद्धरणों वाली एआई से तैयार कानूनी दलीलें दाखिल करने वाले वकीलों को पहले ही दंडित कर चुकी हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने 17 फरवरी 2026 को पर्याप्त जाँच के बिना एआई उपकरणों से तैयार याचिकाएँ दाखिल करने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई। न्यायालय ने कहा कि एआई से तैयार कानूनी दस्तावेज़ों में तथ्यात्मक गलतियाँ और मामलों के गढ़े हुए उद्धरण हो सकते हैं।
यह टिप्पणी उस सुनवाई के दौरान आई, जिसमें पीठ को दाखिल याचिका में एआई से गढ़ी हुई सामग्री मिली। न्यायालय ने भारतीय बार परिषद से कानूनी पेशे में एआई के ज़िम्मेदार उपयोग के लिए दिशानिर्देश बनाने पर विचार करने को कहा। उसने इस बात पर भी बल दिया कि सभी दाखिल दस्तावेज़ों की सटीकता और प्रामाणिकता के लिए वकील व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की अदालतें गढ़े हुए उद्धरणों वाली एआई से तैयार कानूनी दलीलें दाखिल करने वाले वकीलों को पहले ही दंडित कर चुकी हैं।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट की 17 फरवरी 2026 की एआई-निर्मित याचिकाओं पर चिंता तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया विनियमन के लिए उसके निहितार्थों का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
17 फरवरी 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय पीठ ने तथ्यात्मक त्रुटियों एवं गढ़े हुए मामलों के उद्धरणों वाली एआई-निर्मित याचिकाओं पर चिंता जताई। पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से ज़िम्मेदार एआई उपयोग दिशानिर्देश तैयार करने को कहा और इस बात पर बल दिया कि वकील दाखिल दस्तावेजों के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी रहेंगे।
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17 फरवरी 2026 को एआई से तैयार याचिकाओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने क्या चिंता जताई?
भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने पर्याप्त जाँच के बिना एआई उपकरणों से तैयार याचिकाएँ दाखिल करने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई। यह चिंता 17 फरवरी 2026 को जताई गई।
न्यायालय ने एआई से तैयार कानूनी दस्तावेज़ों में कौन से जोखिम बताए?
न्यायालय ने कहा कि एआई से तैयार कानूनी दस्तावेज़ों में तथ्यात्मक गलतियाँ और मामलों के गढ़े हुए उद्धरण हो सकते हैं। सुनवाई के दौरान पीठ को दाखिल याचिका में एआई से गढ़ी हुई सामग्री मिली।
सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय बार परिषद से किस बात पर विचार करने को कहा?
न्यायालय ने भारतीय बार परिषद से कानूनी पेशे में एआई के ज़िम्मेदार उपयोग के लिए दिशानिर्देश बनाने पर विचार करने को कहा। उसने यह भी कहा कि सभी दाखिल दस्तावेज़ों की सटीकता और प्रामाणिकता के लिए वकील व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार हैं।
लेख ने एआई से तैयार याचिकाओं की इस समस्या को भारत से बाहर की अदालतों से कैसे जोड़ा?
यह मुद्दा दूसरे देशों में भी सामने आया है। अमेरिका और ब्रिटेन की अदालतें गढ़े हुए उद्धरणों वाली एआई से तैयार कानूनी दलीलें दाखिल करने वाले वकीलों को पहले ही दंडित कर चुकी हैं।
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