13 अक्टूबर को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (IDDRR) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे आपदा रोकथाम की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया था। 2025 में IDDRR का विषय सेंदाई फ्रेमवर्क 2015–2030 के अनुरूप 'सभी के लिए लचीलापन' है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और UNDRR के आंकड़ों के अनुसार, भारत में एक वर्ष में 3,502 आपदा-संबंधी मौतें दर्ज की गईं।

डाउन टू अर्थ (DTE) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बिजली गिरने से होने वाली मौतों में पिछले छह वर्षों में करीब 400% की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि जलवायु परिवर्तन के कारण वायुमंडलीय नमी और संवहनी गतिविधि में आए बदलावों से जुड़ी है। देश में वर्ष के 235 दिन चरम मौसम की घटनाएं दर्ज की गईं। इसका अर्थ है कि साल के लगभग दो-तिहाई दिनों में देश का कोई न कोई हिस्सा बाढ़, चक्रवात, लू, सूखे या शीत लहर से प्रभावित रहा।

अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्मों — G20 और BIMSTEC — पर भारत 'लचीलेपन को प्राथमिकता' देने की वकालत करता रहा है। भारत द्वारा स्थापित आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) अब 41 सदस्य देशों वाला वैश्विक निकाय बन चुका है।

राजस्थान में आपदाएं अलग-अलग रूपों में सामने आती हैं: गर्मियों में बाड़मेर और जैसलमेर में 50°C से अधिक तापमान, हाड़ोती और शेखावाटी क्षेत्रों में मानसून के दौरान अचानक बाढ़, तथा पश्चिमी शुष्क क्षेत्रों में सूखा। सेंदाई फ्रेमवर्क की चार प्राथमिकताओं — आपदा जोखिम समझना, शासन मजबूत करना, निवेश करना और तैयारी बढ़ाना — में भारत की प्रगति उल्लेखनीय है, परंतु बिजली, बाढ़ और लू से होने वाली मौतों में वृद्धि समुदाय-स्तरीय जोखिम संचार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।