प्रकाशित: 1 अक्टूबर 2025पर्यावरण
सीपीसीबी: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में 13.98 लाख टन ई-कचरा पैदा हुआ
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुमानों के आधार पर संसद को बताया कि भारत में वित्त वर्ष 2023-24 में 12,54,286.55 टन और वित्त वर्ष 2024-25 में 13,97,955.59 टन ई-कचरा पैदा हुआ। जिस ई-कचरे को एकत्र करके अलग-अलग किया गया और फिर पुनर्चक्रित या निपटाया गया, उसका अनुपात वित्त वर्ष 2023-24 के 61.94% से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 70.71% हो गया।
ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 1 अप्रैल 2023 से लागू हैं। इनके तहत उत्पादकों, निर्माताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं और नवीनीकरणकर्ताओं के लिए सीपीसीबी पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है। यह पोर्टल विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व प्रमाणपत्रों के आदान-प्रदान की सुविधा देता है और इसके ज़रिए सत्यापन, लेखा-परीक्षा तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की गई है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
फरवरी 2025 में रिपोर्ट किए गए CPCB आंकड़ों के अनुसार, भारत में कितने पंजीकृत ई-कचरा रिसाइकलर थे?
व्याख्या · सही उत्तर ACPCB के आंकड़ों पर आधारित सरकारी उत्तर के अनुसार 09 फरवरी 2025 तक भारत में 322 पंजीकृत ई-कचरा रिसाइकलर थे। उनकी वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता 22,08,918.064 MT बताई गई थी। यहां प्रश्न पंजीकृत रिसाइकलर पर है; 72 पंजीकृत रिफर्बिशर अलग से बताए गए थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीपीसीबी के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कितना ई-कचरा पैदा किया?
सीपीसीबी ने वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में 13,97,955.59 टन ई-कचरा पैदा होने का अनुमान लगाया; वित्त वर्ष 2023-24 का अनुमान 12,54,286.55 टन था।
ई-कचरे का कितने प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण हुआ?
जिस ई-कचरे को एकत्र करके अलग-अलग किया गया और फिर पुनर्चक्रित या निपटाया गया, उसका अनुपात वित्त वर्ष 2023-24 के 61.94% से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 70.71% हो गया।
भारत में ई-कचरा प्रबंधन किन नियमों से होता है?
ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 1 अप्रैल 2023 से लागू हैं। इन नियमों के तहत ई-कचरे के प्रबंधन और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व से जुड़े दायित्व तय किए गए हैं।
सीपीसीबी का विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व पोर्टल कैसे काम करता है?
इस पोर्टल पर उत्पादकों, निर्माताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं और नवीनीकरणकर्ताओं को पंजीकरण करना होता है। पोर्टल प्रमाणपत्रों के आदान-प्रदान की सुविधा देता है और इसके ज़रिए अनुपालन संबंधी विवरण जमा करने, सत्यापन, लेखा-परीक्षा तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की गई है।
क्या 22 लाख टन और 65 शहरों के आँकड़े विश्वसनीय हैं?
सीपीसीबी के मौजूदा अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में 13,97,955.59 टन ई-कचरा पैदा हुआ।