भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और स्वीडिश राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत के शुक्र परिक्रमा मिशन, जिसे अनौपचारिक रूप से शुक्रयान कहा जाता है, में स्वीडन की भागीदारी औपचारिक हो गई है। यह समझौता प्रधानमंत्री की हालिया स्वीडन की आधिकारिक यात्रा के दौरान हुआ और 21 मई 2026 की समसामयिकी कवरेज में इसे प्रमुखता से शामिल किया गया। शुक्र परिक्रमा मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को लगभग 1,236 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत के साथ मंजूरी दी थी। इस मिशन का उद्देश्य शुक्र की सतह, उपसतह और वायुमंडल का अध्ययन करना है, साथ ही शुक्र के वायुमंडल और सूर्य के बीच की अंतःक्रिया को भी समझना है। इसरो ने 29 मार्च 2028 को प्रक्षेपण की नियोजित तिथि घोषित की है, और अंतरिक्ष यान के लगभग 112 दिनों की यात्रा के बाद 19 जुलाई 2028 को शुक्र की कक्षा में पहुँचने की उम्मीद है। लगभग 100 किलोग्राम के वैज्ञानिक पेलोड में भारत में विकसित उपकरणों के साथ-साथ सहयोगी और अंतर्राष्ट्रीय पेलोड भी शामिल हैं। स्वीडन की भागीदारी से इस मिशन में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग मजबूत होगा और अंतरिक्ष उपकरणों के क्षेत्र में अतिरिक्त विशेषज्ञता मिलेगी। शुक्र को अपने समान आकार और द्रव्यमान के कारण अक्सर पृथ्वी का जुड़वाँ कहा जाता है, लेकिन वहाँ घना कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल और अत्यधिक सतही तापमान वाला प्रतिकूल वातावरण है। शुक्र के अध्ययन से ग्रहीय विकास, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और उन परिस्थितियों की वैज्ञानिक समझ बढ़ने की उम्मीद है, जो ग्रहों को रहने योग्य या अनुपयुक्त बनाती हैं। इससे चंद्रयान और मंगलयान मिशनों के बाद ग्रहीय अन्वेषण में भारत की बढ़ती उपस्थिति और मजबूत होगी।
भारत और स्वीडन ने इसरो के शुक्र परिक्रमा मिशन शुक्रयान में स्वीडिश राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी की भागीदारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, मिशन का प्रक्षेपण मार्च 2028 और शुक्र की कक्षा में प्रवेश जुलाई 2028 में प्रस्तावित
इसरो और स्वीडिश राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने भारत के शुक्र परिक्रमा मिशन शुक्रयान में स्वीडन की भागीदारी को औपचारिक रूप देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके प्रक्षेपण का लक्ष्य 29 मार्च 2028 और शुक्र की कक्षा में प्रवेश का लक्ष्य 19 जुलाई 2028 रखा गया है।
मुख्य तथ्य
- इसरो और स्वीडिश राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने शुक्र परिक्रमा मिशन शुक्रयान में स्वीडन की भागीदारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- शुक्र परिक्रमा मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को लगभग 1,236 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत के साथ मंजूरी दी थी।
- मिशन का प्रक्षेपण 29 मार्च 2028 को लक्षित है और 112 दिनों की यात्रा के बाद 19 जुलाई 2028 को शुक्र की कक्षा में प्रवेश कराने का लक्ष्य है।
- लगभग 100 किलोग्राम के पेलोड में भारतीय, सहयोगी और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक उपकरण शामिल हैं।
- यह मिशन शुक्र की सतह, उपसतह और वायुमंडल तथा सूर्य के साथ उसकी अंतःक्रिया का अध्ययन करेगा।
- शुक्र को समान आकार और द्रव्यमान के कारण पृथ्वी का जुड़वाँ कहा जाता है, लेकिन उसका कार्बन डाइऑक्साइड से भरा वायुमंडल प्रतिकूल है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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शुक्रयान मिशन के संदर्भ में इसरो ने हाल ही में स्वीडिश राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के साथ भागीदारी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह मिशन किस खगोलीय पिंड के अन्वेषण से संबंधित है?
शुक्रयान इसरो के शुक्र परिक्रमा मिशन का अनौपचारिक नाम है। यह नाम शुक्र के संस्कृत शब्द से लिया गया है। मिशन का उद्देश्य शुक्र की सतह, उपसतह और वायुमंडल का अध्ययन करना है। चंद्रयान चंद्रमा से और मंगलयान मंगल से संबंधित है, इसलिए सही उत्तर शुक्र है।
स्रोत: ISRO
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शुक्रयान क्या है?
शुक्रयान इसरो के शुक्र परिक्रमा मिशन का अनौपचारिक नाम है, जिसका उद्देश्य शुक्र की सतह, उपसतह और वायुमंडल तथा सूर्य के साथ उसकी अंतःक्रिया का अध्ययन करना है।
शुक्र परिक्रमा मिशन को कब और कितनी लागत पर मंजूरी दी गई?
शुक्र परिक्रमा मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को लगभग 1,236 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत पर मंजूरी दी थी।
मिशन में स्वीडन की क्या भूमिका है?
स्वीडिश राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने मिशन में भाग लेने के लिए इसरो के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह एजेंसी अंतरिक्ष उपकरणों से जुड़ी विशेषज्ञता देती है और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करती है।
मिशन का प्रक्षेपण और शुक्र पर पहुँचना कब अपेक्षित है?
इसरो ने 29 मार्च 2028 को प्रक्षेपण की नियोजित तिथि घोषित की है, और अंतरिक्ष यान लगभग 112 दिनों की यात्रा के बाद 19 जुलाई 2028 को शुक्र की कक्षा में प्रवेश करने की उम्मीद है।
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