इसरो द्वारा चंद्रयान 2 ऑर्बिटर के उच्च रिज़ॉल्यूशन डेटा के उपयोग से किए गए एक नए अध्ययन में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास क्रेटरों के नीचे छिपी सतह-नीचे की जल-बर्फ के अब तक के कुछ सबसे स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। इसके निष्कर्ष 28 मई 2026 को व्यापक रूप से रिपोर्ट किए गए और सहकर्मी-समीक्षित जर्नल npj स्पेस एक्सप्लोरेशन में प्रकाशित हुए। टीम ने जुलाई 2019 में लॉन्च किए गए चंद्रयान 2 पर लगे दोहरी आवृत्ति सिंथेटिक अपर्चर रडार DFSAR के अवलोकनों का उपयोग किया। यह चंद्रमा का अध्ययन करने के लिए अब तक भेजा गया पहला पूर्ण ध्रुवीय रडार उपकरण है और L और S बैंड माइक्रोवेव आवृत्तियों पर काम करता है। DFSAR चंद्र रेगोलिथ के नीचे कई मीटर तक प्रवेश कर सकता है, इसलिए वह ऐसे बर्फ निक्षेपों का पता लगा सकता है जो ऑप्टिकल संवेदकों को दिखाई नहीं देते। अध्ययन में चंद्र दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में चार दोहरी छाया वाले क्रेटरों के नीचे दबी जल-बर्फ से मेल खाते रडार संकेतों की पहचान हुई। सबसे मजबूत साक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास बड़े फॉस्टिनी क्रेटर के अंदर स्थित 1.1 किलोमीटर चौड़े क्रेटर में मिला, जहां वृत्ताकार ध्रुवीकरण अनुपात मान असामान्य रूप से उच्च हैं। यह रेगोलिथ के साथ मिश्रित जल-बर्फ का स्पष्ट संकेत है। दोहरी छाया वाले क्रेटर स्थायी रूप से छाया में रहने वाले क्षेत्र हैं, जो शीत जाल की तरह काम करते हैं और अरबों वर्षों तक वाष्पशील पदार्थों को फँसाए रखते हैं। यह खोज इसरो के चंद्रयान 4 नमूना-वापसी मिशन, जापान JAXA के साथ संयुक्त नियोजित चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन LUPEX, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन 2035 और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 2040 तक मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहीं उपलब्ध जल-बर्फ जीवन-समर्थन, प्रणोदक और चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर मानव बस्ती के लिए अहम है।