इस सप्ताह के आरंभ में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बहुस्तरीय बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र रक्षा (बीएमडी) क्षमता का सफल परीक्षण किया। यह प्रणाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्रों (ICBM) सहित लक्ष्यों को भेद सकती है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा राष्ट्रों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास ICBM के विरुद्ध रक्षा करने की क्षमता है।
रक्षा मंत्रालय के वक्तव्य के अनुसार DRDO ने 10 और 11 जून को लगातार तीन उड़ान परीक्षण किए, जिनमें लंबी दूरी के बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्रों के विरुद्ध बहुस्तरीय रक्षा तथा मध्यम दूरी पर जहाज-रोधी क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इन्हीं परीक्षणों में बहुस्तरीय बीएमडी क्षमता का सफल प्रदर्शन हुआ।
मंत्रालय ने बताया कि अवरोधकों (इंटरसेप्टर) ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा। ये प्रणालियाँ उभरते प्रक्षेपास्त्र खतरों से निपटने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों से अभिकल्पित और विकसित की गई हैं। वक्तव्य में रेखांकित किया गया कि इन परीक्षणों ने देश को ICBM तक को भेदने की बीएमडी क्षमता रखने वाले चुनिंदा राष्ट्रों के समूह में पहुँचा दिया है।
नौसैनिक जहाज-रोधी प्रक्षेपास्त्र-मध्यम दूरी (NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया। इन उड़ान परीक्षणों को DRDO और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने देखा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के सफल प्रदर्शन पर DRDO को बधाई दी। DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने परीक्षणों की निगरानी की और DRDO तथा उद्योग के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
