मार्च 2026 के पहले सप्ताह में उत्तर भारत में लू की स्थिति असामान्य रूप से जल्दी दिखी। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में दिन का तापमान सामान्य से लगभग 8 से 12 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंचा, जबकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने हिमाचल प्रदेश, विदर्भ और पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में लू की चेतावनी दी। राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई उत्तरी राज्यों के लिए भी अलर्ट जारी हुए। इसलिए यह घटना केवल मौसम की खबर नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सुरक्षा और जलवायु-जोखिम की तैयारी से जुड़ा महत्वपूर्ण समसामयिकी विषय है।

परीक्षा की दृष्टि से इसका महत्व तीन स्तरों पर है। पहला, भारत में लू सामान्यतः मार्च से जून के बीच देखी जाती है, लेकिन मार्च के पहले सप्ताह में ही तीव्र गर्मी का दिखना समय से पहले शुरू हुए लू-जोखिम को दिखाता है। दूसरा, भारत मौसम विज्ञान विभाग के मानदंडों के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान कम-से-कम 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस होने पर, सामान्य से विचलन के आधार पर लू की स्थिति देखी जाती है; 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस का विचलन लू और 6.4 डिग्री सेल्सियस से अधिक विचलन गंभीर लू माना जाता है। तीसरा, ऐसी घटनाएं चेतावनी तंत्र, स्थानीय प्रशासन, पानी और बिजली की मांग, खेतिहर काम और संवेदनशील आबादी की सुरक्षा जैसे मुद्दों से जुड़ती हैं। RAS और UPSC के लिए प्रीलिम्स में तापमान-मानदंड तथा मुख्य परीक्षा में शुरुआती चेतावनी, स्थानीय प्रशासन और आपदा-तैयारी का उपयोगी उदाहरण मिल सकता है।