बिश्नोई समुदाय के लगातार आंदोलन के बाद राजस्थान सरकार ने खेजड़ी वृक्ष (प्रोसोपिस सिनेरेरिया) की कटाई पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया। खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है और थार मरुस्थल में इसका अत्यंत पारिस्थितिक महत्व है — यह चारा और ईंधन देता है तथा मरुस्थलीकरण रोकता है।

बिश्नोई समुदाय में खेजड़ी की रक्षा की सदियों पुरानी परंपरा रही है। 1730 में खेजड़ली में 363 बिश्नोइयों ने पेड़ों को बचाने के लिए बलिदान दिया था। यह प्रतिबंध राजस्थान वन अधिनियम के तहत मौजूदा सुरक्षा को और मजबूत करता है। उल्लंघनकर्ताओं को 5 वर्ष तक कारावास और भारी जुर्माना हो सकता है। पर्यावरणविदों ने इसे समुदाय आधारित संरक्षण का मॉडल बताया।