प्रकाशित: 3 फ़रवरी 2026राजस्थान पत्रिकाराजस्थान
बिश्नोई समुदाय के आंदोलन के बाद राजस्थान ने खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया
बिश्नोई समुदाय के लगातार आंदोलन के बाद राजस्थान सरकार ने खेजड़ी वृक्ष (प्रोसोपिस सिनेरेरिया) की कटाई पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया। खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है और थार मरुस्थल में इसका अत्यंत पारिस्थितिक महत्व है — यह चारा और ईंधन देता है तथा मरुस्थलीकरण रोकता है।
बिश्नोई समुदाय में खेजड़ी की रक्षा की सदियों पुरानी परंपरा रही है। 1730 में खेजड़ली में 363 बिश्नोइयों ने पेड़ों को बचाने के लिए बलिदान दिया था। यह प्रतिबंध राजस्थान वन अधिनियम के तहत मौजूदा सुरक्षा को और मजबूत करता है। उल्लंघनकर्ताओं को 5 वर्ष तक कारावास और भारी जुर्माना हो सकता है। पर्यावरणविदों ने इसे समुदाय आधारित संरक्षण का मॉडल बताया।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान ने खेजड़ी वृक्ष की कटाई पर राज्यव्यापी प्रतिबंध क्यों लगाया?
**राजस्थान सरकार** ने **बिश्नोई समुदाय के निरंतर आंदोलन** के बाद **खेजड़ी वृक्ष (Prosopis cineraria) की कटाई** पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया। खेजड़ी **राजस्थान का राज्य वृक्ष** है और थार मरुस्थल में इसका अत्यंत पारिस्थितिक महत्व है।
राजस्थान में खेजड़ी वृक्ष का पारिस्थितिक महत्व क्या है?
**खेजड़ी वृक्ष (Prosopis cineraria)** का **थार मरुस्थल** में अत्यंत पारिस्थितिक महत्व है: यह **पशुओं के लिए चारा** और **ईंधन** देता है तथा **मरुस्थलीकरण रोकता** है। यह सूखा सहने वाला और नाइट्रोजन-स्थिरीकरण वृक्ष है, जो शुष्क परिस्थितियों में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखता है।
1730 के खेजड़ली नरसंहार का खेजड़ी वृक्ष संरक्षण से क्या ऐतिहासिक संबंध है?
**1730** में **363 बिश्नोइयों ने खेजड़ली (जोधपुर के पास) गांव** में खेजड़ी वृक्षों को बचाने के लिए **बलिदान** दिया। यह घटना विश्व के पहले संगठित पर्यावरण आंदोलन की प्रेरणा बनी और **चिपको आंदोलन** की पूर्वगामी मानी जाती है।
राजस्थान में खेजड़ी वृक्ष पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर क्या दंड है?
**राजस्थान वन अधिनियम** के तहत खेजड़ी वृक्ष पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर **5 वर्ष तक कारावास** और **भारी जुर्माना** हो सकता है। यह प्रतिबंध मौजूदा कानूनी संरक्षण को और मजबूत करता है।
राजस्थान में खेजड़ी वृक्ष पर प्रतिबंध को समुदाय-आधारित संरक्षण का मॉडल क्यों माना जाता है?
**खेजड़ी वृक्ष पर प्रतिबंध** को **समुदाय-आधारित संरक्षण का मॉडल** इसलिए माना जाता है क्योंकि यह सरकारी पहल से नहीं, बल्कि **बिश्नोई समुदाय के निरंतर संघर्ष** से हासिल हुआ। इससे साबित होता है कि सदियों पुरानी परंपराओं वाले समुदाय मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा की मांग प्रभावी ढंग से मनवा सकते हैं।