24 फ़रवरी 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटील और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान 2.0 के क्रियान्वयन पर संयुक्त रूप से उच्च स्तरीय समीक्षा की। समीक्षा में राज्य की उल्लेखनीय प्रगति सामने आई—अभियान के वर्तमान चरण में 88,000 से अधिक कार्य पूरे हो चुके थे और 42,000 से अधिक परियोजनाओं पर काम चल रहा था। इस उपलब्धि के साथ राजस्थान देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हो गया।

जल संचय जन भागीदारी, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन कार्यक्रम के तहत समुदाय की भागीदारी से चलने वाली पहल है। इसका उद्देश्य भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए ढाँचे बनाना, पारंपरिक जल निकायों को फिर से उपयोगी बनाना और छतों पर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना है। इस पहल के पहले चरण में राजस्थान ने देश में तीसरा स्थान हासिल किया था। अब राज्य 2026 के मानसून से पहले भूजल पुनर्भरण बढ़ाने के काम में तेज़ी ला रहा है।

राजस्थान के लिए यह अभियान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पश्चिमी राजस्थान में औसत वर्षा लगभग 313 मिलीमीटर और पूर्वी राजस्थान में लगभग 675 मिलीमीटर होती है; ये देश के सबसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में हैं। राज्य के 60% से अधिक ज़िले जल संकट से जूझ रहे हैं। राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियाँ—बावड़ियाँ (सीढ़ीदार कुएँ), जोहड़ (सामुदायिक तालाब) और टांके (भूमिगत जलकुंड)—JSJB मॉडल का सांस्कृतिक आधार हैं। जयपुर, नागौर और पाली ज़िलों के अतिदोहित प्रखंडों में भूजल प्रबंधन सुधारने के लिए राज्य को अटल भूजल योजना के तहत भी धनराशि मिली है।