भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के साथ साझेदारी में 2026 से 2033 की अवधि के लिए नया आठ-वर्षीय देश रणनीतिक अवसर कार्यक्रम (कोसोप) शुरू किया। इस कार्यक्रम की घोषणा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ग्रामीण समृद्धि के लिए IFAD-भारत साझेदारी कार्यक्रम में की गई, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, IFAD नेतृत्व, विकास साझेदारों, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और ज़मीनी स्तर के व्यवसायियों ने भाग लिया। कोसोप 2026-2033 भारत सरकार के विकसित भारत@2047 दृष्टिकोण के अनुरूप है और दो रणनीतिक प्राथमिकताओं पर केंद्रित है: पहला, ग्रामीण समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और जलवायु-झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ाना; और दूसरा, भारत तथा ग्लोबल साउथ के अन्य देशों में सिद्ध विकास मॉडल के विस्तार के लिए ज्ञान प्रणालियों को मज़बूत करना। यह आठ-वर्षीय रोडमैप लगभग 30 लाख ग्रामीण परिवारों को लक्षित करता है, जो लगभग 1.32 करोड़ व्यक्तियों के बराबर है। यह स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सहकारी समितियों जैसी ज़मीनी संस्थाओं को मज़बूत करने को प्राथमिकता देता है। ये संस्थाएँ किसानों और बाज़ारों, ऋण प्रणालियों, तकनीकी प्लेटफ़ॉर्मों तथा अवसंरचना नेटवर्क के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं। कार्यक्रम के दौरान, IFAD और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने ग्रामीण वित्त प्रणालियों को और मज़बूत करने तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। IFAD के साथ भारत की साझेदारी लगभग पाँच दशकों से चल रही है। इस दौरान कई राज्यों में लगभग 35 ग्रामीण विकास परियोजनाएँ लागू की गई हैं, जिन्होंने लाखों ग्रामीण परिवारों को सहारा दिया है और गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण तथा जलवायु-लचीली आजीविका में योगदान दिया है।