10 जनवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जयपुर में राजस्थान पुलिस के नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह को संबोधित किया, जहाँ I4C की तर्ज पर राजस्थान में साइबर हेल्पलाइन शुरू की गई। राजस्थान के 2026-27 बजट में साइबर अपराधों के नियंत्रण और रोकथाम के लिए राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) स्थापित करने, AI आधारित विश्लेषण, साइबर हेल्पलाइन 1930 के लिए कॉल सेंटर और कार्यालय भवन तथा संबंधित साइबर सुरक्षा कार्यों पर 100 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया। राजस्थान में हाल के वर्षों में साइबर अपराध में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें भरतपुर, डीग और मेवात क्षेत्र कुख्यात साइबर अपराध केंद्र के रूप में उभरे हैं। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने को राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना गृह मंत्रालय के तहत साइबर अपराध से समन्वित और व्यापक ढंग से निपटने के लिए की गई; इसे अक्टूबर 2018 में मंजूरी मिली और इसके मुख्यालय का उद्घाटन 10 जनवरी 2020 को नई दिल्ली में हुआ।
राजस्थान में साइबर हेल्पलाइन शुरू; बजट में राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) और साइबर सुरक्षा कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
10 जनवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जयपुर में राजस्थान पुलिस के नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह को संबोधित किया, जहाँ I4C की तर्ज पर राजस्थान में साइबर हेल्पलाइन शुरू की गई। राजस्थान के 2026-27 बजट ने साइबर अपराधों के नियंत्रण और रोकथाम के लिए राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) स्थापित करने, AI आधारित विश्लेषण, साइबर हेल्पलाइन 1930 के लिए कॉल सेंटर और कार्यालय भवन तथा संबंधित साइबर सुरक्षा कार्यों पर 100 करोड़ रुपये व्यय का प्रस्ताव रखा। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को अक्टूबर 2018 में मंजूरी मिली और इसका मुख्यालय 10 जनवरी 2020 को नई दिल्ली में उद्घाटित हुआ।
मुख्य तथ्य
- R4C साइबर धोखाधड़ी रोकथाम योजना का उद्घाटन 10 जनवरी 2026 को अमित शाह ने राजस्थान में किया।
- R4C केंद्र राजस्थान का पहला साइबर अपराध रिपोर्टिंग केंद्र है, जिस पर ₹100 करोड़ का निवेश हुआ है।
- भरतपुर, डीग और मेवात क्षेत्र राजस्थान में कुख्यात साइबर अपराध केंद्रों के रूप में उभरे हैं।
- केंद्र 24x7 काम करता है और राष्ट्रीय साइबरक्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) से सीधे जुड़ा है।
- राजस्थान भर के स्कूलों, कॉलेजों और पंचायतों में साइबर जागरूकता कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना 2018 में गृह मंत्रालय के तहत हुई।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: जनवरी 2026 में शुरू हुई राजस्थान 4सी साइबर धोखाधड़ी रोकथाम योजना के महत्व तथा राष्ट्रीय आई4सी ढांचे से इसके जुड़ाव पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10 जनवरी 2026 को 100 करोड़ रुपये के निवेश से राजस्थान के आर4सी केंद्र का उद्घाटन किया। चौबीसों घंटे संचालित यह केंद्र साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन से जुड़ा है। भरतपुर, डीग एवं मेवात के साइबर अपराध केंद्रों पर विशेष ध्यान है; आई4सी विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया है।
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आर4सी लेख में राजस्थान के किन जिलों को (हरियाणा के नूह के साथ) 'जामताड़ा जैसे' साइबर अपराध हॉटस्पॉट बताया गया है?
लेख के अनुसार, भरतपुर, डीग और नूह (मेवात क्षेत्र) कुख्यात साइबर अपराध हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं, जिन्हें अक्सर 'जामताड़ा जैसे' केंद्र कहा जाता है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
R4C योजना क्या है और इसका उद्घाटन कब और किसके द्वारा किया गया?
राजस्थान 4C (R4C) साइबर धोखाधड़ी रोकथाम योजना का उद्घाटन 10 जनवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। यह ₹100 करोड़ के निवेश से बनाया गया राजस्थान का पहला समर्पित साइबर अपराध रिपोर्टिंग केंद्र है।
राजस्थान के कौन से क्षेत्र प्रमुख साइबर अपराध केंद्रों के रूप में पहचाने गए हैं?
भरतपुर, डीग और मेवात क्षेत्र राजस्थान में कुख्यात साइबर अपराध केंद्रों के रूप में उभरे हैं।
R4C केंद्र के विशेषज्ञों को किस राष्ट्रीय संस्था ने प्रशिक्षित किया और यह केंद्र कैसे कार्य करता है?
R4C केंद्र के विशेषज्ञों को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने प्रशिक्षित किया है। यह केंद्र 24x7 कार्य करता है और राष्ट्रीय साइबरक्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in से सीधे जुड़ा है।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना कब और किस मंत्रालय के अंतर्गत हुई?
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना 2018 में गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत की गई।
R4C योजना के तहत साइबर जागरूकता के लिए जनता तक पहुंच बनाने की कौन-सी गतिविधियां तय की गई हैं?
राजस्थान भर के स्कूलों, कॉलेजों और पंचायतों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रखना है।
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