प्रकाशित: 24 फ़रवरी 2026पर्यावरण
भारत-नेपाल ने पर्यावरण सहयोग पर MoU पर हस्ताक्षर किए; सीमापार संरक्षण पर जोर
भारत के पर्यावरण मंत्रालय और नेपाल के वन-पर्यावरण मंत्रालय ने 25 फरवरी 2026 को पर्यावरण संरक्षण में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
MoU में तराई आर्क में बाघ और गैंडे सहित सीमा पार वन्यजीव संरक्षण, सीमा क्षेत्र में संयुक्त वायु गुणवत्ता निगरानी, हिमालयी क्षेत्र में जलवायु अनुकूलन और अपशिष्ट प्रबंधन तकनीक की साझेदारी शामिल है। भारत और नेपाल की 1,850 किमी से अधिक खुली सीमा लगती है और दुधवा-बर्दिया, चितवन-वाल्मीकि जैसे संरक्षित क्षेत्र दोनों ओर जुड़े हुए हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फरवरी 2026 में भारत और नेपाल ने पर्यावरण सहयोग से जुड़े किस MoU पर हस्ताक्षर किए?
भारत के **पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय** और नेपाल के **वन और पर्यावरण मंत्रालय** ने **25 फरवरी 2026** को **पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन** में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए एक **MoU** पर हस्ताक्षर किए।
टेराई आर्क क्या है और भारत-नेपाल वन्यजीव संरक्षण में इसका क्या महत्व है?
**टेराई आर्क लैंडस्केप** **नेपाल और उत्तरी भारत (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड)** के तराई जंगलों में फैला 49,000 वर्ग किमी का सीमापार पारिस्थितिकी तंत्र है। यह **बाघों, गैंडों, हाथियों और हिम तेंदुओं** के लिए एक महत्वपूर्ण आवास है।
भारत-नेपाल पर्यावरण MoU 2026 के तहत कौन-कौन से प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं?
MoU में ये क्षेत्र शामिल हैं: **सीमापार वन्यजीव संरक्षण** (टेराई आर्क में बाघ और गैंडे); भारत-नेपाल सीमा पर **संयुक्त वायु गुणवत्ता निगरानी**; **जलवायु परिवर्तन अनुकूलन**; और पर्यावरण डेटा पर **सूचना का आदान-प्रदान**।
भारत-नेपाल वायु गुणवत्ता निगरानी सहयोग कैसे काम करता है?
भारत-नेपाल MoU के तहत सीमापार वायु प्रदूषण पर नज़र रखने के लिए **भारत-नेपाल सीमा पर संयुक्त वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन** स्थापित करने की व्यवस्था है — क्योंकि भारत-गंगा मैदान का प्रदूषण दोनों देशों को प्रभावित करता है।
भारत और नेपाल के बीच सीमापार वन्यजीव संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और नेपाल के वन क्षेत्र **बाघों, गैंडों, हाथियों और घड़ियालों** जैसी प्रजातियों के लिए लगातार जुड़े हुए गलियारों का काम करते हैं। टेराई आर्क **कॉर्बेट, दुधवा और चितवन** राष्ट्रीय उद्यानों को जोड़ता है। संयुक्त संरक्षण से भारत के **प्रोजेक्ट टाइगर** और **प्रोजेक्ट एलीफेंट** लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।