प्रकाशित: 28 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतपर्यावरण
IKI के तहत भारत-जर्मनी की 2 करोड़ यूरो की जलवायु लचीलापन पहल: हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर भारत पर ध्यान
फरवरी 2026 के अंत में, जर्मनी ने अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (IKI — Internationale Klimaschutzinitiative) के तहत भारत के लिए 2 करोड़ यूरो की बड़ी अनुदान परियोजना की घोषणा की। नई दिल्ली में उच्च स्तरीय भारत-जर्मनी जलवायु संवाद के दौरान घोषित यह पहल भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा एकल IKI अनुदान है।
परियोजना में पांच प्राथमिकता क्षेत्र शामिल हैं: हिमालय, द्वीप क्षेत्र, पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर और निचला गंगा का मैदान। यह पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) उपायों को बढ़ावा देगी, जिनमें वन पुनर्स्थापन, जैव विविधता कॉरिडोर की आपसी कनेक्टिविटी, बाढ़ और कटाव नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और समुदाय के नेतृत्व में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन शामिल हैं। यह पहल भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) और इसके आठ राष्ट्रीय मिशनों — विशेषकर राष्ट्रीय हरित भारत मिशन और राष्ट्रीय हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण मिशन — को पूरक बनाती है।
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जुड़ा प्रश्नआसान
IKI के तहत भारत-जर्मनी 2 करोड़ यूरो की जलवायु-सहनशीलता पहल से जुड़ा यह घटनाक्रम मुख्य रूप से किस श्रेणी में आता है?
व्याख्या · सही उत्तर Dअंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल के तहत भारत-जर्मनी की 2 करोड़ यूरो की यह पहल जोखिम वाले पारिस्थितिक क्षेत्रों में जलवायु-सहनशीलता बढ़ाने पर केंद्रित है। इसमें वन बहाली, जैव विविधता गलियारे, बाढ़ और कटाव नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और समुदाय-आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं। इसलिए इसकी मुख्य श्रेणी पर्यावरण और पारिस्थितिकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में घोषित भारत-जर्मनी IKI जलवायु लचीलापन पहल क्या है?
फरवरी 2026 के अंत में जर्मनी ने IKI (अंतरराष्ट्रीय जलवायु पहल) के तहत भारत को €2 करोड़ का अनुदान घोषित किया — यह भारत के लिए सबसे बड़ा एकल IKI अनुदान है। इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) से हिमालय, पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर भारत, द्वीप क्षेत्रों और निचले गंगा के मैदान में जलवायु लचीलापन बढ़ाना है।
IKI क्या है और इसका वित्तपोषण कौन करता है?
IKI (अंतरराष्ट्रीय जलवायु पहल / Internationale Klimaschutzinitiative) जर्मनी का प्रमुख वैश्विक जलवायु वित्त कार्यक्रम है, जिसका वित्तपोषण जर्मन संघीय बजट से होता है। यह विकासशील और उभरते देशों में जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन परियोजनाओं को बढ़ावा देता है।
पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) क्या है और इस पहल में इसका उपयोग कैसे होता है?
EbA ऐसा दृष्टिकोण है जिसमें समुदायों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने के लिए प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र — जैसे वन, आर्द्रभूमि और मैंग्रोव — की सेवाओं का उपयोग किया जाता है। भारत-जर्मनी IKI पहल हिमालय, पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर भारत जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए EbA का उपयोग करती है।
IKI जलवायु लचीलापन अनुदान के तहत भारत के कौन से क्षेत्र लक्षित हैं?
€2 करोड़ का IKI अनुदान पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है: हिमालय, पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर भारत, द्वीप क्षेत्र (जैसे अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप) और निचले गंगा के मैदान — ये सभी जलवायु प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
भारत-जर्मनी IKI पहल भारत की राष्ट्रीय जलवायु नीति से कैसे मेल खाती है?
यह पहल जलवायु परिवर्तन पर भारत की राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) और इसके 8 राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है, जिनमें हरित भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं।