पर्यावरण मंत्रालय की समिति ने वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत एकसमान दंड की सिफारिश की है। इससे अलग-अलग राज्यों में लगने वाले जुर्मानों की जगह राष्ट्रीय स्तर का दंड ढाँचा लागू होगा। प्रस्ताव में अपराध की गंभीरता के अनुसार दंड तय करने और ऑनलाइन अनुपालन निगरानी की व्यवस्था शामिल है।

अभी समान वन अपराधों के लिए अलग-अलग राज्य बहुत अलग दंड लगाते हैं। प्रस्तावित सुधार के तहत अपराध की गंभीरता, प्रभावित वन क्षेत्र और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के आधार पर न्यूनतम से अधिकतम दंड की श्रेणियाँ तय की जाएँगी। राजस्थान के 32,737 वर्ग किमी वन क्षेत्र के लिए एकसमान दंड व्यवस्था सारिस्का, रणथंभौर और अन्य रिज़र्वों में प्रवर्तन को मजबूत करेगी।