भारत ने 2 फरवरी 2026 को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया, जिसका विषय 'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव' था। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने आर्द्रभूमि संरक्षण में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया। देश में रामसर स्थलों की संख्या 2014 के 26 से बढ़कर 2026 में 98 हो गई है और ये स्थल 13.6 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं। भारत अब एशिया में पहले और ब्रिटेन तथा मेक्सिको के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर है।

विशेषज्ञों ने आर्द्रभूमि प्रबंधन में पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को शामिल करने पर ज़ोर दिया। राजस्थान में 2 रामसर स्थल हैं — केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) और सांभर झील। भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील सांभर अवैध नमक खनन और अतिक्रमण जैसी समस्याओं से लगातार जूझ रही है। विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर में आर्द्रभूमियों पर रामसर सम्मेलन अपनाए जाने की याद भी दिलाता है।