पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) द्वारा संयुक्त रूप से जारी भारत के पहले राष्ट्रीय गिद्ध सर्वेक्षण (NVS-2025) में सक्रिय घोंसला स्थलों में 70% गिरावट सामने आई।

देशभर में केवल 312 सक्रिय घोंसला कॉलोनियाँ दर्ज की गईं, जबकि 2000 के दशक की शुरुआत में इनकी संख्या 1,050 से अधिक थी। भारत में गिद्धों की 9 प्रजातियाँ हैं, जिनमें 4 गंभीर रूप से लुप्तप्राय हैं। पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली दवा डाइक्लोफेनैक, आवास की कमी और भोजन की कमी प्रमुख खतरे हैं। राजस्थान का जोड़बीर संरक्षण रिज़र्व, बीकानेर के पास, एशिया के सबसे बड़े गिद्ध आवासों में से एक है।