2025 का नोबेल भौतिकी पुरस्कार उस शोध-कार्य के लिए दिया गया जिसने दिखाया कि क्वांटम यांत्रिकी केवल उपपरमाणविक दुनिया तक सीमित नहीं है। जॉन क्लार्क ने UC बर्कले में SQUID (सुपरकंडक्टिंग क्वांटम इंटरफेरेंस डिवाइस) पर अग्रणी काम किया, जो चुंबकीय क्षेत्रों को मापने वाले सबसे संवेदनशील उपकरणों में से एक है। मिशेल डेवोरे ने येल में पहला सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट — 'क्वांट्रोनियम' — बनाया, जो क्वांटम कंप्यूटरों का आधारभूत घटक बना।

जॉन मार्टिनिस ने UC सांता बारबरा में 2019 में गूगल के क्वांटम सुप्रीमेसी प्रयोग का नेतृत्व किया, जब सिकामोर प्रोसेसर ने 200 सेकंड में ऐसी गणना की जिसे करने में एक शास्त्रीय सुपरकंप्यूटर को लगभग 10,000 वर्ष लगते। उनके संयुक्त कार्य ने दिखाया कि मैक्रोस्कोपिक विद्युत परिपथ भी सुपरपोजिशन और एंटैंगलमेंट सहित क्वांटम व्यवहार दिखा सकते हैं।

इस शोध ने सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स के विकास को संभव बनाया है, जो फिलहाल गूगल, IBM और अन्य कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे क्वांटम कंप्यूटरों की अग्रणी तकनीक है। इसके उपयोग क्रिप्टोग्राफी, दवा खोज, सामग्री विज्ञान और अनुकूलन समस्याओं में हैं।