30–31 मार्च 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की कि भारत ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त होने का अपना तय लक्ष्य हासिल कर लिया है। CPI (माओवादी) की पूरी 21-सदस्यीय केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो को निष्क्रिय कर दिया गया है — 12 मारे गए, 8 ने आत्मसमर्पण किया और केवल एक फरार है, जिससे वार्ता चल रही है। माओवाद प्रभावित जिलों की संख्या घटकर महज दो रह गई है और 'सर्वाधिक प्रभावित' जिले शून्य हो गए हैं।

इस सफलता के पीछे तीन-स्तरीय रणनीति रही: COBRA (कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) जैसी विशेष इकाइयों के लगातार सुरक्षा अभियान, पूर्व 'लाल गलियारे' में सड़कें, स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और राशन की दुकानें सहित बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास, और आकर्षक आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति, जिसमें ₹50,000 की तत्काल सहायता, 36 महीने का मासिक वजीफा, PM आवास योजना के तहत आवास और कक्षा 12 तक बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। ऐतिहासिक रूप से माओवादी हिंसा का केंद्र रहा छत्तीसगढ़ का बस्तर अब तेज़ विकास देख रहा है। इस उग्रवाद में कई दशकों में लगभग 20,000 लोगों की जान गई थी।