भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) ने वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT) से नौ औद्योगिक क्षेत्रों को अपने दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की। इनमें एल्युमीनियम, क्लोर-क्षार, सीमेंट, उर्वरक, लोहा और इस्पात, लुगदी और कागज़, पेट्रोरसायन, पेट्रोलियम शोधन और वस्त्र शामिल हैं। भारत के कुल उत्सर्जन में इन क्षेत्रों का लगभग 16% हिस्सा है। अप्रैल 2025 में चार क्षेत्रों और जून 2025 में पाँच अन्य क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस (GHG) के उत्सर्जन की तीव्रता के मसौदा लक्ष्य जारी किए गए; ये लक्ष्य 740 से अधिक औद्योगिक इकाइयों पर लागू होते हैं। भारतीय कार्बन बाज़ार के 2026 के मध्य तक औपचारिक रूप से शुरू होने की उम्मीद है। जनवरी 2026 में पेट्रोलियम शोधन, पेट्रोरसायन और वस्त्र क्षेत्रों के अंतिम लक्ष्य अधिसूचित किए गए।
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना: नौ क्षेत्रों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT) से 9 औद्योगिक क्षेत्रों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत के कुल उत्सर्जन में इन क्षेत्रों का लगभग 16% हिस्सा है और भारतीय कार्बन बाज़ार के 2026 के मध्य तक शुरू होने की उम्मीद है।
मुख्य तथ्य
- भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) ने वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT) से नौ औद्योगिक क्षेत्रों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की
- नौ क्षेत्रों—एल्युमीनियम, क्लोर-क्षार, सीमेंट, उर्वरक, लोहा और इस्पात, लुगदी और कागज़, पेट्रोरसायन, पेट्रोलियम शोधन और वस्त्र—का भारत के कुल उत्सर्जन में लगभग 16% हिस्सा है
- इस योजना में 740 से अधिक औद्योगिक इकाइयाँ शामिल हैं
- अप्रैल 2025 में चार क्षेत्रों और जून 2025 में पाँच अन्य क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन की तीव्रता के मसौदा लक्ष्य जारी किए गए
- भारतीय कार्बन बाज़ार के 2026 के मध्य तक औपचारिक रूप से शुरू होने की उम्मीद है
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: समझाइए कि नौ औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT) से कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) में लाने की प्रक्रिया 2026 के मध्य तक प्रस्तावित भारतीय कार्बन बाज़ार की शुरुआत को कैसे प्रभावित करेगी।
उत्तर (50 शब्द):
वित्त वर्ष 2025-26 में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) ने प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT) से नौ क्षेत्रों—एल्युमीनियम, क्लोर-क्षार, सीमेंट, उर्वरक, लोहा और इस्पात, लुगदी और कागज़, पेट्रोरसायन, पेट्रोलियम शोधन और वस्त्र—को अपने दायरे में लाना शुरू किया। इन क्षेत्रों में 740 से अधिक औद्योगिक इकाइयाँ हैं और भारत के कुल उत्सर्जन में इनका लगभग 16% हिस्सा है। भारतीय कार्बन बाज़ार के 2026 के मध्य तक औपचारिक रूप से शुरू होने की उम्मीद है।
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बेलेम में COP30 में, भारत ने 2005-2020 के बीच GDP उत्सर्जन तीव्रता में कितनी कमी की?
भारत ने COP30 में बताया कि 2005-2020 के बीच GDP की उत्सर्जन तीव्रता 36% कम हुई।
स्रोत: ICAP
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) में कौन-कौन से नौ क्षेत्र शामिल किए जा रहे हैं?
भारत की **कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS)** में शामिल **नौ क्षेत्र** हैं: **एल्युमीनियम, क्लोर-क्षार, सीमेंट, उर्वरक, लोहा और इस्पात, लुगदी और कागज़, पेट्रोरसायन, पेट्रोलियम शोधन और वस्त्र**। भारत के कुल उत्सर्जन में इनका लगभग 16% हिस्सा है।
भारत की प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT) क्या थी और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) इससे कैसे अलग है?
भारत की **प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT)** ऊर्जा दक्षता से जुड़ा कार्यक्रम था, जिसकी जगह वित्त वर्ष 2025-26 से **कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS)** ले रही है। CCTS अधिक व्यापक बाज़ार-आधारित व्यवस्था है, जिसमें उद्योग ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन की तीव्रता के लक्ष्यों के आधार पर **कार्बन क्रेडिट यानी भारतीय कार्बन बाज़ार इकाइयों (ICMUs)** का व्यापार करते हैं।
भारतीय कार्बन बाज़ार (ICM) की स्थापना कब और किस कानून के तहत हुई?
घरेलू कार्बन व्यापार व्यवस्था बनाने के लिए **भारतीय कार्बन बाज़ार (ICM)** की स्थापना **ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022** के तहत हुई। यह बाज़ार **भारतीय कार्बन बाज़ार इनक्यूबेटर (ICMI)** के ज़रिए चलता है और व्यापार योग्य प्रमाणपत्र जारी करता है, जिन्हें **भारतीय कार्बन बाज़ार इकाइयाँ (ICMUs)** कहा जाता है।
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना में कितनी औद्योगिक इकाइयाँ शामिल हैं?
भारत की **कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS)** में नौ क्षेत्रों की **740 से अधिक औद्योगिक इकाइयाँ** शामिल हैं। अप्रैल 2025 में चार क्षेत्रों और जून 2025 में पाँच अन्य क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन की तीव्रता के मसौदा लक्ष्य जारी किए गए और वित्त वर्ष 2025-26 में इन क्षेत्रों को प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (PAT) से CCTS में लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना के नौ क्षेत्रों का भारत के कुल उत्सर्जन में लगभग कितना हिस्सा है?
भारत की **कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS)** के नौ क्षेत्रों—जिनमें सीमेंट, लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक और वस्त्र शामिल हैं—का भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग **16%** हिस्सा है।
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