CJI बी.आर. गवई एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की सर्वोच्च न्यायालय पीठ ने दिल्ली-NCR में दीवाली 2025 के लिए पूर्ण पटाखा प्रतिबंध में ढील देते हुए केवल NEERI-अनुमोदित 'हरित पटाखों' की सशर्त अनुमति दी। बिक्री केवल 18–20 अक्टूबर को नामित स्थानों पर। पटाखे फोड़ने का समय दीवाली के दिन सुबह 6–7 बजे एवं रात 8–10 बजे तक सीमित। न्यायालय ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से प्रदूषण नहीं घटा, बल्कि पारंपरिक प्रदूषणकारी पटाखों की तस्करी बढ़ी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निगरानी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। यह आदेश सांस्कृतिक उत्सव के अधिकार एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को दर्शाता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-NCR में दीवाली 2025 के लिए सशर्त हरित पटाखों की अनुमति दी
CJI बी.आर. गवई एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की सर्वोच्च न्यायालय पीठ ने दिल्ली-NCR में दीवाली 2025 के लिए पूर्ण पटाखा प्रतिबंध में ढील देते हुए केवल NEERI-अनुमोदित 'हरित पटाखों' की सशर्त अनुमति दी। बिक्री केवल 18–20 अक्टूबर को नामित स्थानों पर। पटाखे फोड़ने का समय दीवाली के दिन सुबह 6–7 बजे एवं रात 8–10 बजे तक सीमित। न्यायालय ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से प्रदूषण नहीं घटा, बल्कि पारंपरिक प्रदूषणकारी पटाखों की तस्करी बढ़ी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निगरानी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। यह आदेश सांस्कृतिक उत्सव के अधिकार एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
- सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-NCR में दीवाली 2025 के लिए पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध में ढील दी।
- केवल NEERI-अनुमोदित 'हरित पटाखों' की अनुमति सख्त दिशानिर्देशों के तहत दी गई।
- दीवाली (20 अक्टूबर) को पटाखे फोड़ने का समय सुबह 6-7 बजे और रात 8-10 बजे तक सीमित रहा।
- बिक्री केवल 18-20 अक्टूबर को निर्धारित स्थानों पर ही सीमित थी।
- न्यायालय ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की तस्करी बढ़ी थी।
- यह आदेश अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार और सांस्कृतिक उत्सव की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाता है।
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अक्टूबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय की किस पीठ ने दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर में केवल नीरी-अनुमोदित हरित पटाखों की अनुमति दी?
CJI बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की सर्वोच्च न्यायालय पीठ ने दीपावली 2025 के लिए दिल्ली-NCR में व्यापक पटाखा प्रतिबंध में ढील दी और कड़ी शर्तों के तहत केवल NEERI-अनुमोदित हरित पटाखों की अनुमति दी।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'हरित पटाखे' क्या होते हैं और ये पारंपरिक पटाखों से कैसे अलग हैं?
हरित पटाखे वे पटाखे हैं जिन्हें राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) ने स्वीकृत किया है। इनमें कम हानिकारक रसायन होते हैं और पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30% कम सूक्ष्म कण निकलते हैं। इनमें बेरियम नाइट्रेट नहीं होता, जो पारंपरिक पटाखों में पाया जाने वाला विषैला पदार्थ है।
सर्वोच्च न्यायालय ने दीवाली 2025 के लिए दिल्ली-NCR में पटाखे फोड़ने पर कौन-से प्रतिबंध लगाए?
सर्वोच्च न्यायालय ने दीवाली 2025 के लिए दिल्ली-NCR में केवल NEERI-अनुमोदित हरित पटाखों की अनुमति दी। बिक्री केवल 18–20 अक्टूबर को नामित स्थानों पर। दीवाली (20 अक्टूबर) को पटाखे फोड़ने का समय सुबह 6–7 और रात 8–10 बजे तक सीमित रहा। पारंपरिक प्रदूषणकारी पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ण प्रतिबंध बनाए रखने की बजाय उसमें ढील क्यों दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि पूर्ण प्रतिबंध दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को प्रभावी रूप से नहीं घटा पाया। इसके बजाय इससे पारंपरिक प्रदूषणकारी पटाखों की तस्करी बढ़ी, जो फिर भी फोड़े गए। न्यायालय ने नियंत्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए सख्त समय-सीमा में हरित पटाखों की अनुमति को प्रदूषण नियंत्रण और सांस्कृतिक उत्सव के बीच संतुलन का व्यावहारिक तरीका माना।
सर्वोच्च न्यायालय का पटाखा आदेश अनुच्छेद 21 के अधिकारों का संतुलन कैसे करता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसकी व्याख्या सर्वोच्च न्यायालय ने स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार के रूप में की है। 2025 का आदेश इसी अधिकार और दीवाली मनाने की सांस्कृतिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है, क्योंकि इसमें केवल कम उत्सर्जन वाले हरित पटाखों को निर्धारित समय-सीमा में फोड़ने की अनुमति दी गई।
सर्वोच्च न्यायालय के पटाखा आदेश को लागू करवाने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की क्या भूमिका है?
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया कि वे हरित पटाखों से जुड़े दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें, दीवाली के दौरान वायु गुणवत्ता की वास्तविक समय में निगरानी करें, बिक्री और समय संबंधी प्रतिबंधों को लागू करवाएं तथा न्यायालय को अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।
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