प्रकाशित: 7 जनवरी 2026समाचार स्रोतराजस्थान
'विकसित भारत में पुलिसिंग' विषय पर राज्य-स्तरीय पुलिस सम्मेलन राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित
राजस्थान पुलिस अकादमी जयपुर में 8 और 9 जनवरी 2026 को 'विकसित भारत में पुलिसिंग' विषय पर राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन आयोजित किया गया। दो दिवसीय सम्मेलन में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिला अधीक्षक और नीति विशेषज्ञ विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप पुलिसिंग को आधुनिक बनाने पर विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सम्मेलन विषय पर मुख्य प्रस्तुतिकरण दिया, जबकि पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने राजस्थान में पुलिसिंग के भविष्य का रोडमैप प्रस्तुत किया। प्रमुख चर्चाएं अपराध रोकथाम में AI और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग, जन भागीदारी मॉडल से सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने और भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम सहित नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर केंद्रित थीं।
सम्मेलन में राजस्थान के सामने मौजूद साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा हुई, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ डिजिटल अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अधिकारियों ने हर जिले में साइबर पुलिस स्टेशन की स्थापना और डिजिटल फोरेंसिक क्षमताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर चर्चा की। पाकिस्तान के साथ राजस्थान की 1070 किमी अंतर्राष्ट्रीय सीमा को देखते हुए सीमा क्षेत्र पुलिसिंग पर भी ध्यान दिया गया।
सम्मेलन के निष्कर्षों में प्रौद्योगिकी अपनाने, प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और पुलिस तथा खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से राज्य पुलिस बल को आधुनिक बनाने की सिफारिशें शामिल थीं। भाग लेने वाले अधिकारियों ने मजबूत कानून प्रवर्तन क्षमताओं को बनाए रखते हुए सार्वजनिक विश्वास बढ़ाने वाली समुदाय-केंद्रित पुलिसिंग अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।
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प्रश्न: राजस्थान पुलिस सम्मेलन कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नए आपराधिक कानूनों से आधुनिकीकरण कैसे दर्शाता है?
उत्तर (50 शब्द):
8-9 जनवरी 2026 को पुलिस अकादमी में हुए सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अपराध रोकथाम, ग्रामीण इंटरनेट से पैदा साइबर चुनौतियों और भारतीय न्याय संहिता तथा नागरिक सुरक्षा संहिता के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। परिणामों में प्रत्येक जिले में साइबर थाना, डिजिटल फोरेंसिक प्रशिक्षण और 1,070 किलोमीटर पाकिस्तान सीमा पर मजबूत पुलिस व्यवस्था शामिल रही।
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जुड़ा प्रश्नआसान
8 जनवरी 2026 को राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन का विषय क्या था?
व्याख्या · सही उत्तर Aसम्मेलन का विषय विकसित भारत में पुलिसिंग था, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप था और AI से अपराध रोकथाम, सामुदायिक पुलिसिंग और साइबर सुरक्षा पर केंद्रित था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
8 जनवरी 2026 को आयोजित राजस्थान पुलिस सम्मेलन का विषय क्या था और यह कहाँ आयोजित हुआ?
सम्मेलन 8 जनवरी 2026 को राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर में 'विकसित भारत में पुलिसिंग' विषय पर आयोजित हुआ। इसमें AI-संचालित अपराध रोकथाम, स्मार्ट पुलिसिंग और नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया।
BNS, BNSS और BSA क्या हैं और राजस्थान पुलिस सम्मेलन में इन पर चर्चा क्यों हुई?
BNS (भारतीय न्याय संहिता), BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) और BSA (भारतीय साक्ष्य अधिनियम) भारत के तीन नए आपराधिक कानून हैं, जिन्होंने 2024 में क्रमशः IPC, CrPC और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली। सम्मेलन में इनकी चर्चा इसलिए हुई क्योंकि पुलिस बल को इन ऐतिहासिक विधायी परिवर्तनों के अनुसार जाँच, अभियोजन और साक्ष्य प्रक्रियाओं को ढालना है।
राजस्थान पुलिस सम्मेलन में आधुनिक पुलिसिंग में AI की क्या भूमिका बताई गई?
आधुनिक पुलिसिंग में AI का उपयोग अपराधों का पहले से अंदाज़ा लगाने वाले विश्लेषण, चेहरा पहचान प्रणाली, CCTV निगरानी के स्वचालन और डेटा के आधार पर गश्त तय करने में होता है। सम्मेलन में स्मार्ट पुलिसिंग ढाँचे के तहत अपराधों की सक्रिय रोकथाम, प्रतिक्रिया समय में सुधार और नागरिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए इन तकनीकों को एक साथ अपनाने पर चर्चा हुई।
राजस्थान पुलिस अकादमी क्या है और इसका क्या महत्व है?
राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) जयपुर में स्थित राजस्थान के पुलिस अधिकारियों की प्रमुख प्रशिक्षण संस्था है। यह अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग कौशल, कानून लागू करने की तकनीकों और नेतृत्व क्षमताओं से लैस करने के लिए प्रवेश प्रशिक्षण, सेवाकालीन प्रशिक्षण और विशेष पाठ्यक्रम प्रदान करती है।
'स्मार्ट पुलिसिंग' क्या है और यह 'विकसित भारत' की दृष्टि से कैसे जुड़ी है?
स्मार्ट पुलिसिंग का मतलब ऐसी कानून-व्यवस्था से है जिसमें तकनीक, डेटा और समुदाय की भागीदारी के आधार पर पुलिसिंग की जाती है। इसमें दक्षता और जन-विश्वास बढ़ाने के लिए डिजिटल उपकरणों, विश्लेषण और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का उपयोग होता है। यह विकसित भारत 2047 की दृष्टि से जुड़ी है, क्योंकि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में सार्वजनिक सुरक्षा बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण आवश्यक है।