केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (CWDB), वस्त्र मंत्रालय ने ICAR-केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर के सहयोग से जनवरी 2026 में राजस्थान के टोंक जिले के अविकानगर में 'भारतीय ऊन क्षेत्र की चुनौतियाँ, अवसर और भावी संभावनाएँ' विषय पर एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। मुख्य उद्देश्य था भारत की आयातित उच्च गुणवत्ता ऊन पर भारी निर्भरता को कम करना — भारत वर्तमान में अपनी लगभग 70-80% महीन ऊन की जरूरत मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से आयात करता है। इस शिविर में वस्त्र मंत्रालय के नीति-निर्माता, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, लद्दाख, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब की राज्य सरकारें, अनुसंधान संस्थान, उद्योग जगत और स्टार्ट-अप शामिल हुए। प्रमुख क्षेत्रों में टिकाऊ भेड़ पालन, देशी नस्लों (चोकला, मालपुरा, नाली) का सुधार, तकनीकी वस्त्र और ऊन-आधारित कार्यात्मक सामग्री में R&D, ऊन प्रसंस्करण बुनियादी ढाँचा, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत भारतीय ऊन का निर्यात प्रोत्साहन शामिल थे। राजस्थान भारत के कुल ऊन उत्पादन में लगभग 47.5% हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य है।
अविकानगर, राजस्थान में भारतीय ऊन क्षेत्र पर चिंतन शिविर आयोजित: CWDB और ICAR-CSWRI ने आयात निर्भरता कम करने का रोडमैप तैयार किया
केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (CWDB), वस्त्र मंत्रालय ने ICAR-केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर के सहयोग से जनवरी 2026 में राजस्थान के टोंक जिले के अविकानगर में 'भारतीय ऊन क्षेत्र की चुनौतियाँ, अवसर और भावी संभावनाएँ' विषय पर एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की आयातित उच्च गुणवत्ता वाली ऊन पर भारी निर्भरता को कम करना था — भारत वर्तमान में अपनी लगभग 70-80% महीन ऊन की जरूरत मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से आयात करता है। इस शिविर में वस्त्र मंत्रालय के नीति-निर्माता, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, लद्दाख, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब की राज्य सरकारें, अनुसंधान संस्थान, उद्योग जगत और स्टार्ट-अप शामिल हुए। मुख्य क्षेत्रों में टिकाऊ भेड़ पालन, देशी नस्लों (चोकला, मालपुरा, नाली) का सुधार, तकनीकी वस्त्र और ऊन-आधारित कार्यात्मक सामग्री में R&D, ऊन प्रसंस्करण बुनियादी ढाँचा, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत भारतीय ऊन के निर्यात को प्रोत्साहन शामिल थे। राजस्थान भारत के कुल ऊन उत्पादन में लगभग 47.5% हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य है।
मुख्य तथ्य
- CWDB और ICAR-CSWRI ने अविकानगर, टोंक, राजस्थान में भारतीय ऊन क्षेत्र पर चिंतन शिविर आयोजित किया।
- भारत अपनी 70-80% महीन ऊन की आवश्यकता मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से आयात के ज़रिए पूरी करता है।
- राजस्थान भारत के कुल ऊन उत्पादन में लगभग 47.5% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
- राजस्थान की देशी चोकला, मालपुरा और नाली भेड़ नस्लों में सुधार प्रमुख प्राथमिकता है।
- शिविर का लक्ष्य बाजार की जरूरतों पर आधारित समग्र रोडमैप से आयात निर्भरता कम करना है।
- भारत में लगभग 12 करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए भेड़ पालन और ऊन उत्पादन पर निर्भर हैं।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2016 राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित नस्ल सुधार कार्यक्रम की विवेचना कीजिए। — राजस्थान में नस्ल सुधार पर यह प्रश्न सीधे चिंतन शिविर में चोकला, मालपुरा और नाली जैसी देसी भेड़ नस्लों के सुधार पर ध्यान केंद्रित करने से संबंधित है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: अविकानगर में ऊन क्षेत्र चिंतन शिविर का आयात निर्भरता कम करने और राजस्थान के ऊन उत्पादन नेतृत्व को सुदृढ़ करने के लिए महत्व मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
सीडब्ल्यूडीबी और सीएसडब्ल्यूआरआई ने टोंक जिले के अविकानगर में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड से भारत की 70-80% बारीक ऊन आयात निर्भरता कम करने के लिए शिविर आयोजित किया। राजस्थान राष्ट्रीय ऊन उत्पादन में 47.5% योगदान देता है। चोकला, मालपुरा, नाली नस्ल सुधार और 12 करोड़ भेड़-पालन आश्रितों की आजीविका प्राथमिकताएं हैं।
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टोंक जिले के अविकानगर में चिंतन शिविर का आयोजन सीडब्ल्यूडीबी ने किस अनुसंधान संस्थान के सहयोग से किया?
लेख के अनुसार चिंतन शिविर का आयोजन सीडब्ल्यूडीबी ने आईसीएआर-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, सीएसडब्ल्यूआरआई अविकानगर, के सहयोग से किया। यह संस्थान भारत में भेड़ और ऊन अनुसंधान का प्रमुख केंद्र है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (CWDB) क्या है और यह किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है?
केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (CWDB) एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना भारत में ऊन उत्पादन और ऊन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई है। यह भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। CWDB भेड़ नस्ल सुधार, प्रौद्योगिकी उन्नयन और ऊन उत्पादकों के लिए बाजार विकसित करने जैसे ऊन क्षेत्र से जुड़े प्रयासों का समन्वय करता है।
ICAR-CSWRI क्या है और यह कहाँ स्थित है?
ICAR-CSWRI का पूर्ण रूप है भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद — केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान। यह राजस्थान के टोंक जिले में अविकानगर में स्थित है। यह भेड़ और ऊन अनुसंधान के लिए भारत का प्रमुख संस्थान है, जो चोकला, मालपुरा और नाली जैसी देशी भेड़ नस्लों के सुधार पर कार्य करता है।
भारत की आयातित ऊन पर निर्भरता कितनी है और प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश कौन से हैं?
भारत वर्तमान में अपनी महीन ऊन की लगभग 70-80% जरूरत आयात से पूरी करता है। प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं, जो मेरिनो और अन्य उच्च गुणवत्ता वाली महीन ऊन नस्लों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इस भारी आयात निर्भरता के कारण भारत का ऊन उद्योग अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है — इसीलिए चिंतन शिविर देश में महीन ऊन उत्पादन क्षमता विकसित करने पर केंद्रित था।
भारत के ऊन उत्पादन में राजस्थान की कितनी हिस्सेदारी है और राज्य की देशी भेड़ नस्लें कौन सी हैं?
राजस्थान भारत के कुल ऊन उत्पादन में लगभग 47.5% हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य है। राजस्थान की देशी भेड़ नस्लों में चोकला (महीन कालीन ऊन के लिए जानी जाती है), मालपुरा और नाली शामिल हैं। ये नस्लें राजस्थान की शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु के अनुकूल हैं और अविकानगर में आयोजित चिंतन शिविर में मुख्य ध्यान इन नस्लों की ऊन की गुणवत्ता और मात्रा सुधारने पर रहा।
भारत में भेड़ पालन पर कितने लोग आजीविका के लिए निर्भर हैं और RPSC RAS परीक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में लगभग 12 करोड़ लोग भेड़ पालन और ऊन उत्पादन पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं, मुख्यतः ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में। RPSC RAS परीक्षा के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजस्थान की आर्थिक भूगोल (47.5% ऊन उत्पादन हिस्सेदारी), कृषि से जुड़े क्षेत्रों, ग्रामीण आजीविका, आयात-निर्यात नीति और वस्त्र मंत्रालय की पहलों को जोड़ता है — ये सब RAS पाठ्यक्रम के प्रमुख विषय हैं।
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