प्रकाशित: 10 फ़रवरी 2026राजस्थान
राजस्थान भारत के ऊन उत्पादन में 47.5% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर; चोकला और मगरा नस्लें उत्पादन का आधार
फरवरी 2026 में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान ने भारत के सबसे बड़े ऊन उत्पादक राज्य के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की है — वित्त वर्ष 2023-24 में 16,013.50 हजार किलोग्राम उत्पादन, देश के कुल 3.369 करोड़ किलोग्राम उत्पादन का लगभग 47.53%। जम्मू-कश्मीर 7,770 हजार किग्रा (23.06%) के साथ दूसरे स्थान पर है, इसके बाद गुजरात (2,083.50 हजार किग्रा, 6.18%), महाराष्ट्र (1,601.28 हजार किग्रा, 4.75%) और हिमाचल प्रदेश (1,422.69 हजार किग्रा, 4.22%) हैं।
राजस्थान की बढ़त का मुख्य कारण इसके विशाल अर्ध-शुष्क चरागाह हैं, जो भेड़ पालन के लिए उपयुक्त हैं — विशेषकर चोकला भेड़ ('भारत का मेरिनो' कहलाती है) और बीकानेर-नागौर क्षेत्र की मगरा भेड़। राजस्थान सरकार के अधीन भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड नस्ल सुधार, ऊन कतराई शिविर और ऊन विपणन सहकारिताएं संचालित करता है।
भारत का ऊन क्षेत्र लगभग 1.5 करोड़ पशुपालक और चरवाहा समुदायों को रोजगार देता है। अविकानगर, राजस्थान में स्थित केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI) नस्ल सुधार अनुसंधान करता है। ऊन उद्योग राजस्थान के हस्तशिल्प — विशेषकर जयपुर के प्रसिद्ध ऊनी कालीन बुनाई उद्योग — का अभिन्न अंग है।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराजस्थानविषयआर्थिकपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · प्रारंभिक
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान भारत के ऊन उत्पादन में क्यों अग्रणी है और इसकी हिस्सेदारी कितनी है?
राजस्थान अपने विशाल अर्ध-शुष्क परिदृश्य, लंबी पशुपालन परंपरा और देश में भेड़ों की सबसे बड़ी संख्या के कारण ऊन उत्पादन में अग्रणी है। राज्य 16,013.50 हजार किग्रा ऊन उत्पादन करता है, जो भारत के कुल उत्पादन (लगभग 33,714 हजार किग्रा) का 47.5% है। राजस्थान की गर्म और शुष्क जलवायु भेड़ पालन के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल है और लाखों खानाबदोश एवं पशुपालक समुदायों की आजीविका इस उद्योग पर आधारित है।
चोकला और मगरा भेड़ नस्लें क्या हैं और राजस्थान की ऊन अर्थव्यवस्था में इनका महत्व क्यों है?
चोकला नस्ल, जिसे अक्सर 'भारत का मेरिनो' कहा जाता है, अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली ऊन के लिए प्रसिद्ध है और राजस्थान की प्रमुख ऊन उत्पादक भेड़ नस्ल है। मगरा नस्ल, जो मुख्यतः बीकानेर और नागौर क्षेत्रों में पाई जाती है, कालीन और कंबल के लिए उपयुक्त मोटी लेकिन टिकाऊ ऊन के लिए जानी जाती है। ये दोनों नस्लें राजस्थान के ऊन उत्पादन में बड़ा योगदान देती हैं और अविकानगर स्थित CSWRI के नस्ल सुधार कार्यक्रमों का केंद्र हैं।
CSWRI क्या है और यह कहाँ स्थित है?
केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI) भेड़ पालन और ऊन विज्ञान के लिए भारत का प्रमुख अनुसंधान संस्थान है। यह राजस्थान के टोंक जिले के अविकानगर में स्थित है। CSWRI नस्ल सुधार, रोग प्रबंधन, पोषण और ऊन गुणवत्ता पर शोध करता है। यह उन्नत भेड़ नस्लें विकसित करता है और राजस्थान की ऊन का बाजार मूल्य बढ़ाने के लिए यांत्रिक कतरन और गुणवत्ता ग्रेडिंग को बढ़ावा देता है। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्य करता है।
भारत के ऊन उत्पादन में राजस्थान के बाद कौन से राज्य हैं और दुनिया में भारत का स्थान क्या है?
राजस्थान (47.5%) के बाद भारत में ऊन उत्पादन के प्रमुख राज्य जम्मू-कश्मीर और गुजरात हैं। भारत का कुल ऊन उत्पादन लगभग 33,714 हजार किग्रा है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष उत्पादकों में आता है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया, चीन और न्यूजीलैंड जैसे देश महीन ऊन उत्पादन में आगे हैं। भारत की ऊन मुख्यतः कालीन, कंबल और शॉल में घरेलू उपयोग के लिए जाती है।
राजस्थान में ऊन उत्पादन और पशुपालकों को सहायता देने वाली सरकारी योजनाएं कौन सी हैं?
राजस्थान के ऊन क्षेत्र को कई योजनाओं से मदद मिलती है: (1) वस्त्र मंत्रालय के तहत ऊन विकास बोर्ड यांत्रिक कतरन कार्यक्रम चलाता है; (2) अविकानगर स्थित CSWRI केंद्रीय झुंड से किसानों को उन्नत नस्ल के मेढ़े प्रदान करता है; (3) एकीकृत ऊन विकास कार्यक्रम गुणवत्ता ग्रेडिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण और बाजार संपर्क को बढ़ावा देता है; (4) राजस्थान सरकार की पशुधन योजनाएं रेबारी और गुर्जर जैसे खानाबदोश समुदायों को सहायता देती हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य राजस्थान की ऊन से होने वाली आय और उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुधारना है।