दिसंबर 2025 में अलवर जिले की सिलिसेढ़ झील, राजस्थान को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित किया गया — यह भारत की 96वीं और राजस्थान की 5वीं रामसर साइट बनी। यह घोषणा छत्तीसगढ़ के कोपरा जलाशय (भारत की 95वीं रामसर साइट) के साथ की गई। 1845 में अलवर के महाराजा विनय सिंह के शासनकाल में निर्मित यह ऐतिहासिक झील मूल रूप से अलवर शहर को पेयजल आपूर्ति करती थी और आज लगभग 7 वर्ग किलोमीटर में फैली है। सरिस्का टाइगर रिजर्व के निकट और अर्ध-शुष्क परिदृश्य में स्थित सिलिसेढ़ असाधारण जैव विविधता को आश्रय देती है — इसमें 149 पक्षी प्रजातियाँ और 17 स्तनधारी प्रजातियाँ हैं, जिनमें संकटग्रस्त रिवर टर्न और लुप्तप्राय बंगाल बाघ शामिल हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस घोषणा का स्वागत किया और कहा कि इससे संरक्षण प्रयासों को बल मिलेगा, पारिस्थितिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और जल संसाधन प्रबंधन में सुधार होगा। राजस्थान की पाँच रामसर साइटें — केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान, सांभर झील, मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स, खीचन वेटलैंड और सिलिसेढ़ झील — राज्य की खारी झीलों, पक्षी अभयारण्यों और मीठे पानी के जलाशयों से बनी विविध आर्द्रभूमि धरोहर को दर्शाती हैं। 1971 में ईरान के रामसर में हस्ताक्षरित रामसर कन्वेंशन के अनुसार, नामित साइटों का पारिस्थितिक चरित्र संरक्षण और समझदारी भरे उपयोग से बनाए रखा जाना चाहिए।