प्रकाशित: 13 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतशासन
आंध्र प्रदेश MLA उपस्थिति के लिए AI-आधारित चेहरा पहचानने की प्रणाली का उपयोग करने वाली भारत की पहली विधायिका बनी
14 फरवरी 2026 को आंध्र प्रदेश के बजट सत्र 2026 की शुरुआत एक अभूतपूर्व AI-संचालित चेहरा पहचान उपस्थिति प्रणाली के शुभारंभ के साथ हुई, जिससे आंध्र प्रदेश विधानसभा इस तकनीक को अपनाने वाली भारत की पहली विधायिका बन गई। यह पहल अध्यक्ष सी.एच. अय्यन्ना पात्रुडु ने घोषित की।
इस प्रणाली में विधानसभा कक्ष के अंदर विशेष पैन-टिल्ट-ज़ूम (PTZ) कैमरे लगाए गए हैं। उपस्थिति तभी दर्ज होती है जब सदस्य स्वयं अपनी निर्धारित सीट पर बैठे हों, जिससे विधायकों द्वारा उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करके कार्यवाही में भाग लिए बिना चले जाने की पुरानी प्रथा समाप्त होती है। प्रणाली उपस्थिति की अवधि भी दर्ज करती है और देर से आने तथा जल्दी जाने का पता लगाती है। हाथ से भरे जाने वाले पारंपरिक रजिस्टर पर आधारित उपस्थिति प्रणाली पूरी तरह बंद कर दी गई है। यह कदम विधायी जवाबदेही, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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जुड़ा प्रश्नआसान
आंध्र प्रदेश की कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित विधायिका प्रणाली शासन के किस पक्ष से जुड़ी महत्त्वपूर्ण पहल है?
व्याख्या · सही उत्तर Bआंध्र प्रदेश विधानसभा में विधायकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल प्रणाली शुरू की गई, जिससे मैनुअल रजिस्टर की जगह चेहरे की पहचान से उपस्थिति दर्ज होती है। यह पहल सदन के कामकाज में डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी है, रक्षा, कृषि या स्वास्थ्य सेवा से नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विधायकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए AI चेहरा पहचान प्रणाली लागू करने वाली भारत की पहली विधायिका आंध्र प्रदेश कब बनी?
14 फरवरी 2026 को आंध्र प्रदेश विधायकों की उपस्थिति के लिए AI-आधारित चेहरा पहचान प्रणाली अपनाने वाली भारत की पहली विधायिका बना। इसी दिन आंध्र प्रदेश विधान सभा में यह प्रणाली आधिकारिक रूप से लागू की गई और पारंपरिक मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर की जगह इसका उपयोग शुरू हुआ।
आंध्र प्रदेश में AI चेहरा पहचान उपस्थिति प्रणाली कैसे काम करती है?
इस प्रणाली में विधानसभा कक्ष में PTZ (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे केवल तभी उपस्थिति दर्ज करते हैं जब विधायक अपनी निर्धारित सीटों पर वास्तव में बैठे हों, जिससे प्रॉक्सी या फर्जी उपस्थिति रुकती है।
AI चेहरा पहचान विधायी जवाबदेही की किन समस्याओं को हल करती है?
पारंपरिक मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर में हेरफेर, किसी और से हस्ताक्षर करवाने और सदस्यों की भागीदारी पर ठीक से नजर न रख पाने की आशंका रहती थी। AI आधारित चेहरा पहचान प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि उपस्थिति तभी दर्ज हो जब सदस्य वास्तव में अपनी निर्धारित सीट पर मौजूद हो, जिससे विधायी कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
भारत में शासन के आधुनिकीकरण के लिए इस पहल का क्या महत्व है?
AI आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने वाली पहली भारतीय विधायिका बनकर आंध्र प्रदेश ने तकनीक आधारित शासन सुधार में अग्रणी भूमिका निभाई है। यह प्रणाली देश की अन्य राज्य विधायिकाओं के लिए उपस्थिति व्यवस्था को आधुनिक बनाने का अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।
PTZ कैमरे क्या होते हैं और विधायी उपस्थिति पर नजर रखने के लिए ये उपयुक्त क्यों हैं?
PTZ का मतलब है पैन-टिल्ट-जूम कैमरे, जो क्षैतिज दिशा में घूम सकते हैं, ऊपर-नीचे झुक सकते हैं और जूम कर सकते हैं। लचीले संचालन और उच्च रिज़ॉल्यूशन के कारण ये विधानसभा कक्ष में कई निर्धारित सीटों को स्कैन करने और पहचान के लिए चेहरे की विशेषताओं को सटीक रूप से दर्ज करने के लिए उपयुक्त होते हैं।