लोकसभा ने 1 अप्रैल 2026 को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया, जिसमें अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित किया गया और 2014 में विभाजन के बाद से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त हुई। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश यह विधेयक लगभग सर्वसम्मति से ध्वनि मत से पारित हुआ। राज्यसभा ने 2 अप्रैल 2026 को इसे पारित किया। यह विधेयक आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 की धारा 5(2) में संशोधन करता है — "एक नई राजधानी होगी" वाक्यांश की जगह "और अमरावती नई राजधानी होगी" लिखा गया, जिससे अमरावती को वैधानिक मान्यता मिली। 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दो राज्य बने थे, हैदराबाद दस वर्षों तक संयुक्त राजधानी रही। पूर्व मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की सरकार ने तीन राजधानियों — अमरावती (विधायी), कुर्नूल (न्यायिक) और विशाखापट्टनम (कार्यकारी) — का विवादास्पद प्रस्ताव रखा था, जो बाद में रद्द हो गया। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इसे राज्य के लिए "ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण" बताया। YSRCP ने भूमि देने वाले किसानों को वादे पूरे करने की समयसीमा की मांग करते हुए वॉकआउट किया। RAS की दृष्टि से यह संविधान के अनुच्छेद 3 और 4 के तहत संसद की राज्यों के पुनर्गठन की शक्ति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।