गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत लद्दाख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की निवारक हिरासत रद्द कर दी और जोधपुर जेल से उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। 59 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर को सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिनमें चार लोगों की मौत हुई थी। उन पर NSA लगाया गया था, जिसके तहत औपचारिक आरोप लगाए बिना 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। वांगचुक लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा या आदिवासी समुदायों के लिए संवैधानिक सुरक्षा (छठी अनुसूची) की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट उनकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, तभी रिहाई का आदेश आया।
जोधपुर जेल में लगभग छह महीने बाद केंद्र ने सोनम वांगचुक की NSA नजरबंदी रद्द की
केंद्र ने जोधपुर जेल में ~6 महीने बाद वांगचुक की NSA नजरबंदी रद्द की; वे लद्दाख को राज्य का दर्जा या छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने की मांग करते हैं।
मुख्य तथ्य
- गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2026 को लद्दाख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की NSA के तहत निवारक हिरासत रद्द कर जोधपुर जेल से तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
- 59 वर्षीय वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिनमें चार लोग मारे गए थे।
- NSA के तहत बिना औपचारिक आरोप के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।
- वांगचुक ने लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा या आदिवासी समुदायों के लिए छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण की मांग की।
- उच्चतम न्यायालय उनकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, तभी रिहाई का आदेश आया।
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राष्ट्रीय वन शहीद दिवस राजस्थान की किस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में है?
राष्ट्रीय वन शहीद दिवस (11 सितंबर) 1730 के खेजड़ली नरसंहार की स्मृति में है जहाँ 363 बिश्नोई ने पेड़ बचाते प्राण दिए।
स्रोत: Al Jazeera
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोनम वांगचुक को मार्च 2026 में जोधपुर जेल से NSA के तहत हिरासत से क्यों रिहा किया गया?
गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2026 को सोनम वांगचुक की NSA के तहत हिरासत रद्द कर जोधपुर जेल से तत्काल रिहाई का आदेश दिया। वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में राज्य के दर्जे या छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था।
NSA क्या है और सोनम वांगचुक पर इसे क्यों लगाया गया?
NSA राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक-व्यवस्था से जुड़े कारणों के आधार पर 12 महीने तक निवारक हिरासत की अनुमति देता है। सोनम वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में राज्य के दर्जे या छठी अनुसूची की मांग से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था।
सोनम वांगचुक ने NSA हिरासत से पहले लद्दाख में किस बात का विरोध किया?
सोनम वांगचुक लद्दाख में राज्य के दर्जे या छठी अनुसूची संरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन से जुड़े थे। सितंबर 2025 में जिन विरोध प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई, उनके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जोधपुर जेल में NSA के तहत रखा गया।
छठी अनुसूची क्या है और लद्दाख के कार्यकर्ताओं ने इसकी मांग क्यों की?
छठी अनुसूची जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों से जुड़ा संवैधानिक प्रावधान है। वांगचुक और लद्दाख के अन्य कार्यकर्ताओं ने 2019 में केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख की जनजातीय पहचान, भूमि और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य का दर्जा या छठी अनुसूची के तहत संरक्षण मांगा।
NSA हिरासत रद्द होने से पहले सोनम वांगचुक जोधपुर जेल में कितने समय रहे?
सोनम वांगचुक लगभग छह महीने, यानी सितंबर 2025 से 14 मार्च 2026 तक, जोधपुर जेल में रहे। उस दिन गृह मंत्रालय ने उनकी NSA हिरासत रद्द कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
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