प्रकाशित: 31 जनवरी 2026टॉपिक
सरकार ने कचरे को स्रोत पर अलग करना अनिवार्य करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 अधिसूचित किए
केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों में भारत भर के बड़े अपशिष्ट उत्पादकों और स्थानीय निकायों के लिए स्रोत पर कचरे का प्रसंस्करण अनिवार्य किया गया है। परीक्षा की दृष्टि से यह विषय शहरी पर्यावरण शासन, स्थानीय निकायों की जवाबदेही और चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ता है। नियमों का मुख्य संदेश यह है कि कचरे को केवल लैंडफिल तक भेजना समाधान नहीं है; स्रोत पर अलगाव, प्रसंस्करण और जिम्मेदारी तय करना अब नीति का केंद्र है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन्हें 28-29 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया और ये 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी होंगे। पुराने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 की तुलना में नई व्यवस्था में स्रोत पर चार धाराओं में कचरा अलग करना प्रमुख बदलाव है: गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी कचरा और विशेष देखभाल कचरा। इससे नगर निकायों के लिए संग्रह, प्रसंस्करण और निपटान की जिम्मेदारी अधिक स्पष्ट होती है।
बड़े प्रतिष्ठानों के लिए बड़े अपशिष्ट उत्पादकों की विस्तारित जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक फर्श क्षेत्र वाली इकाइयों को अपने कचरे का प्रबंधन करना होगा, केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल से अनुपालन पर नज़र रखी जाएगी और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के तहत पर्यावरणीय मुआवजा लागू हो सकता है। नियम पुराने डंप स्थलों की बायोमाइनिंग और उत्पादक की विस्तारित जिम्मेदारी को भी मजबूत करते हैं। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में यह विषय प्रीलिम्स में पर्यावरणीय नियमों, स्थानीय शासन और कचरा प्रबंधन के तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए तथा मुख्य परीक्षा में शहरी पर्यावरण शासन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही के विश्लेषण के लिए उपयोगी है।
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Tनगरीय एवं ग्रामीण स्थानीय शासन
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Tपर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय परिवर्तन
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 क्या हैं और ये कब प्रभावी होंगे?
ये केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन्हें 28-29 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया और ये 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी होंगे।
इन नियमों में स्रोत पर कचरे को किन धाराओं में अलग करना है?
स्रोत पर कचरे को 4 धाराओं में अलग करना है: गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी कचरा और विशेष देखभाल कचरा। यह बदलाव संग्रह और प्रसंस्करण को अधिक व्यवस्थित बनाता है।
बड़े अपशिष्ट उत्पादकों की विस्तारित जिम्मेदारी किस पर लागू होती है?
यह 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक फर्श क्षेत्र वाली संस्थाओं, जैसे बड़े मॉल, कार्यालय और औद्योगिक इकाइयों, पर लागू होती है। इन्हें अपने कचरे का प्रबंधन करना होगा और अनुपालन पर केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल से नज़र रखी जाएगी।
परीक्षा की दृष्टि से यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विषय पर्यावरणीय नियमों, शहरी स्थानीय निकायों, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, चक्रीय अर्थव्यवस्था और शहरी पर्यावरण शासन से जुड़ता है। इसलिए यह प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा, दोनों के लिए उपयोगी है।